कालपी के मदारपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब: मदार साहब की दरगाह पर बसंत पंचमी मेले में दिखी सांप्रदायिक सद्भाव की अनुपम झलक

कालपी (जालौन): जनपद के ऐतिहासिक नगर कालपी के समीपवर्ती ग्राम मदारपुर में शुक्रवार को आस्था, विश्वास और आपसी भाईचारे का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। यमुना नदी के पावन तट पर स्थित महान सूफी संत हजरत मदार साहब के आस्ताने पर वार्षिक विशाल बसंत पंचमी मेले का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के कोने-कोने से आए हजारों श्रद्धालुओं ने जात-पात और धर्म की दीवारों को लांघकर मदार साहब की चौखट पर मत्था टेका और अपनी मन्नतें मांगी।
सांप्रदायिक एकता का केंद्र बना मदारपुर
मदारपुर स्थित यह दरगाह सदियों से हिंदू-मुस्लिम एकता और साझा संस्कृति का प्रतीक रही है। शुक्रवार को आयोजित मेले में जहां एक ओर बसंत पंचमी के उल्लास की लहर थी, वहीं दूसरी ओर सूफियाना माहौल ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दरगाह परिसर में सुबह से ही जायरीनों का तांता लगना शुरू हो गया था। पूरे दिन “दम मदार बेड़ा पार” के नारों से वातावरण गुंजायमान रहा। मेले में आए विभिन्न धर्मों के लोगों ने अपनी-अपनी धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना और इबादत की, जो वर्तमान समय में सामाजिक समरसता का एक सशक्त संदेश दे रहा है।
सूफी संत की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक: छोटे लाल निषाद
मेला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस सद्भावना मेले के दौरान एक औपचारिक सभा का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक और पूर्व ग्राम प्रधान छोटे लाल निषाद ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए हजरत मदार शाह के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “महान सूफी संत हजरत मदार शाह ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा और दीन-दुखियों की मदद के लिए समर्पित कर दिया था। उनकी शिक्षाएं हमें प्रेम, दया और सहिष्णुता का मार्ग दिखाती हैं। आज इस मेले में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि इंसानियत का धर्म सबसे ऊपर है।”
क्षेत्र के विकास और सौंदर्यीकरण का संकल्प
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए नगर पालिका परिषद कालपी के अध्यक्ष अरविंद यादव ने दरगाह की महत्ता को स्वीकार करते हुए विकास का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि यद्यपि यह पवित्र धर्मस्थल कालपी नगरीय निकाय की सीमा के भौगोलिक दायरे से बाहर स्थित है, किंतु इसकी महत्ता और जन-आस्था को देखते हुए इसके सर्वांगीण विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य सरकारी स्रोतों और विशेष योजनाओं के माध्यम से दरगाह क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को सुधारा जाएगा।
इसी क्रम में, रिटायर्ड दरोगा अमर सिंह चंदेल ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने दरगाह परिसर के सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति
मेले के सफल आयोजन में स्थानीय प्रशासन और गणमान्य व्यक्तियों का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर कल्लू मस्तान, राजकुमार बाल्मिक, और आशु यादव सहित कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। साथ ही, पत्रकारिता जगत से डिस्ट्रिक्ट प्रेस क्लब कालपी के तहसील अध्यक्ष सलीम अंसारी, महामंत्री अमित यादव, और कैफ रजा ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की और इस आयोजन को सामाजिक एकता के लिए मील का पत्थर बताया।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
यमुना तट पर आयोजित इस मेले में सुरक्षा के दृष्टिगत भी कड़े इंतजाम देखे गए। भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्वयंसेवकों और पुलिस प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाई। मेले में आए बच्चों और महिलाओं के लिए खान-पान और मनोरंजन के विभिन्न स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। देर शाम तक चले इस मेले ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि बुंदेलखंड की धरती पर सूफी-संतों की विरासत आज भी उतनी ही जीवंत और प्रेरणादायी है।
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