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यूजीसी का कदम ‘सनातन विरोधी’, समाज नहीं करेगा स्वीकार: अयोध्या के पीठाधीश्वर राघवदास महाराज ने बोला हमला

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अयोध्या के जगन्नाथ धाम मंदिर के पीठाधीश्वर राघवदास महाराज कोंच में पंडित रमेश चंद्र पटेरिया के आवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए

रिपोर्ट : राहुल,जालौन ।UP SAMVAD

कोंच (जालौन): शिक्षा और संस्कारों की धुरी माने जाने वाले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हालिया रुख और नीतियों को लेकर आध्यात्मिक जगत में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। अयोध्या स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ धाम मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी राघवदास महाराज ने यूजीसी को सीधे तौर पर ‘सनातन विरोधी’ करार देते हुए एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा के नाम पर सनातन के मूल सिद्धांतों से खिलवाड़ किया गया, तो हिंदू समाज इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

​महाराज ने यह तल्ख टिप्पणी नगर के विद्वत परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी पंडित रमेश चंद्र पटेरिया के आवास पर आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान की। यहाँ वे स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं से संवाद करने पहुंचे थे।

जातियों में विभाजन: सनातन की जड़ों पर प्रहार

​प्रेस वार्ता के दौरान महाराज ने शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते जातिगत प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज सनातन धर्म को कमजोर करने के लिए समाज को जातियों के छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। महाराज ने कड़े शब्दों में कहा, “शिक्षा के पवित्र क्षेत्र में विद्यार्थियों के साथ जातिगत आधार पर भेदभाव करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि घोर निंदनीय भी है। यूजीसी वर्तमान में सनातन संस्कृति के लिए एक गंभीर खतरा बनकर उभर रहा है।”

“हाथी के पांव” वाली कहावत से सरकार को घेरा

​सरकार और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए राघवदास महाराज ने एक पुरानी कहावत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ‘हाथी के पांव’ के समान है, जिसमें सभी मत-पंथों और वर्गों के पांव समा जाते हैं। यह सबको साथ लेकर चलने वाली संस्कृति है। लेकिन वर्तमान में यूजीसी के बहाने इस व्यापकता को खत्म करने की कोशिश की जा रही है, जो इस प्राचीन कहावत को झुठलाने जैसा है।

​उन्होंने सरकार को आगाह करते हुए कहा, “आपने पूर्व में दो बार गलतियां कीं, जिसे हमने और समाज ने क्षमा कर दिया। लेकिन यह तीसरी बड़ी गलती है, जिसे माफ नहीं किया जा सकता।” महाराज का इशारा संभवतः उन नीतियों की ओर था जो हाल के वर्षों में पारंपरिक शिक्षा और धार्मिक मूल्यों के बीच टकराव का कारण बनी हैं।

बिना विमर्श के लिए गए फैसलों से समाज में भ्रम

​स्वामी राघवदास महाराज ने आरोप लगाया कि यूजीसी और संबंधित विभागों ने बिना व्यापक विचार-विमर्श और चिंतन के ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे आम जनता और छात्र वर्ग के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षा नीति में बदलाव से पहले धर्मशास्त्रियों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग की राय लेना आवश्यक था। इस तरह के अपरिपक्व निर्णय समाज में विभाजन और असमंजस का बीज बो रहे हैं।

मानवता और करुणा का मार्ग ही सनातन

​सनातन धर्म की महिमा का वर्णन करते हुए पीठाधीश्वर ने कहा कि हमारी संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक संस्कृति है। यह केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि मानवता, सेवा, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की एक जीवन पद्धति है। यदि शिक्षा व्यवस्था इन मूल मूल्यों के विपरीत कार्य करेगी, तो आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली इतिहास से कट जाएंगी।

एकता और सद्भाव का आह्वान

​कार्यक्रम के अंत में उन्होंने समस्त हिंदू समाज से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि हम आपसी मतभेदों को भुलाकर सनातन धर्म की रक्षा, सामाजिक सद्भाव और आपसी एकता को बनाए रखें।

​इस महत्वपूर्ण अवसर पर केके श्रीवास्तव, साकेत पटेरिया, अनिल पटेरिया, रामकिशोर पुरोहित, केशव बबेले, दिलीप तिवारी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने महाराज के विचारों का पुरजोर समर्थन किया।

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RAHUL

Rahul (रिपोर्टर,जालौन) जालौन जनपद में स्थानीय समाचारों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करते हैं।

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