मनरेगा बना ‘लूट की गारंटी’ डाबर माधौगढ़ में कागजों पर चल रहे फावड़े, 232 मजदूरों के नाम पर लाखों डकारने की तैयारी

0
जालौन के नदीगांव ब्लॉक स्थित डाबर माधौगढ़ में खाली पड़े खेत जहाँ कागजों पर मनरेगा कार्य और मजदूरों की हाजिरी दिखाई गई है, लेकिन धरातल पर निर्माण कार्य गायब है।

रिपोर्ट- साजिद जालौन | UP SAMVAD

नदीगांव (जालौन): उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी और बिचौलिए इस नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं। ताजा मामला जालौन जिले के नदीगांव विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत डाबर माधौगढ़ से सामने आया है, जहाँ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) महज सरकारी धन की लूट का जरिया बनकर रह गया है। यहाँ धरातल पर काम का एक पत्थर तक नहीं हिला, लेकिन कागजों में 232 मजदूरों की ‘फौज’ खड़ी कर लाखों रुपये के भुगतान की पूरी पटकथा लिख दी गई है।

बिना बोर्ड, बिना काम: सिर्फ पोर्टल पर हो रहा विकास

​नियमों के मुताबिक, किसी भी मनरेगा कार्य को शुरू करने से पहले वहां सीआईबी (Citizen Information Board) लगाना अनिवार्य है, ताकि आम जनता को कार्य की लागत, मजदूरों की संख्या और समयावधि की जानकारी मिल सके। लेकिन डाबर माधौगढ़ में इन नियमों को ताक पर रख दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गाँव में न तो कोई बोर्ड लगा है और न ही कहीं मिट्टी का काम हो रहा है। इसके बावजूद, ऑनलाइन रिकॉर्ड में काम को जोरों-शोरों से चलता हुआ दिखाया जा रहा है।

दो बांधों के नाम पर फर्जीवाड़े का खेल

​विकास खंड के अधिकारियों और बिचौलियों की जुगलबंदी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में एक साथ 24 मस्टरोल जारी किए गए हैं। इन मस्टरोलों में मुख्य रूप से दो कार्यों को आधार बनाया गया है:

  1. ज्ञानेश के खेत से रोड तक जलरोधक बांध का निर्माण।
  2. भैया लाल के मकान से किशोर के खेत तक जलरोधक बांध का निर्माण।

​हैरानी की बात यह है कि इन दोनों कार्यों के लिए पोर्टल पर 232 मजदूरों की फर्जी हाजिरी दर्ज की गई है। स्थानीय सूत्रों और मौके की स्थिति के अनुसार, वहां कोई निर्माण कार्य अस्तित्व में ही नहीं है। यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने में सेंध लगाने का प्रयास है।

पात्र मजदूर दर-दर भटक रहे, अपात्रों की लग रही हाजिरी

​भ्रष्टाचार के इस खेल का सबसे काला पक्ष यह है कि गाँव के वे वास्तविक मजदूर, जिन्हें वास्तव में काम की तलाश है, वे आज भी बेरोजगार होकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। दूसरी ओर, प्रधान, सचिव और ब्लॉक के तकनीकी सहायकों की मिलीभगत से उन लोगों के नाम पर मस्टरोल भरे जा रहे हैं जो या तो मौके पर मौजूद ही नहीं हैं या फिर बिना काम किए कमीशन के खेल में शामिल हैं।

जिम्मेदारों का रुख और कार्रवाई का आश्वासन

​जब इस बड़े फर्जीवाड़े की गूँज जिला मुख्यालय तक पहुँची, तो अधिकारियों ने रटा-रटाया जवाब देना शुरू कर दिया है। इस संबंध में DC मनरेगा रामेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया कि:

​”मामला गंभीर है और हमारे संज्ञान में आया है। डाबर माधौगढ़ में चल रहे कार्यों की स्थलीय जांच कराई जाएगी। यदि मस्टरोल और धरातल की स्थिति में भिन्नता पाई जाती है, तो संबंधित सचिव, प्रधान और तकनीकी कर्मचारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

कब थमेगी कमीशनखोरी?

​नदीगांव ब्लॉक में यह कोई पहला मामला नहीं है जब मनरेगा में इस तरह की धांधली सामने आई हो। अधिकारियों की ‘शह’ और बिचौलियों की ‘पकड़’ ने इस जनहितकारी योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन केवल जांच के नाम पर खानापूर्ति करता है या वाकई इन सफेदपोश लुटेरों पर कोई शिकंजा कसा जाता है।

Leave a Reply

You may have missed