प्राचीन गणेश मंदिर गढ़ी में ‘महंती गद्दी’ का भव्य अभिषेक, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पं. संदीप शाण्डिल्य ने संभाली जिम्मेदारी

कोंच में प्राचीन गणेश मंदिर गढ़ी पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महंती गद्दी ग्रहण करते पं. संदीप शाण्डिल्य और आशीर्वाद देते महामंडलेश्वर एवं साधु-संत
रिपोर्ट-साजिद जालौन | UP SAMVAD
कोंच (जालौन): ऐतिहासिक नगर कोंच की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर में बुधवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। तहसील परिसर के समीप स्थित प्राचीन एवं सिद्ध गणेश मंदिर गढ़ी पर आयोजित एक भव्य धार्मिक समारोह में वर्षों से मंदिर की सेवा में समर्पित पुजारी पं. संदीप शाण्डिल्य को विधिवत रूप से ‘महंती गद्दी’ सौंपी गई। सनातन धर्म की उच्च परंपराओं के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित महामंडलेश्वरों और संत समाज ने इसे धर्म संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
वैदिक अनुष्ठान और परंपराओं का निर्वहन
महंती गद्दी सौंपने की प्रक्रिया पूरी तरह शास्त्रोक्त विधि से संपन्न हुई। इस पुनीत अवसर पर महामंडलेश्वर राघवेंद्र दास पिरौना एवं महामंडलेश्वर सिद्धराम दास (मुख्य, ठड़ेश्वरी मंदिर) के सानिध्य में प्रकांड विद्वानों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार किया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में हवन-पूजन और विशेष अभिषेक का दौर चलता रहा। मंदिर को गेंदे और गुलाब की मालाओं से आकर्षक रूप से सजाया गया था, जबकि श्रद्धालुओं द्वारा किए जा रहे भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्ति के रस में सराबोर रहा।
महंती: पद नहीं, अपितु सेवा और त्याग का संकल्प
अभिषेक के पश्चात आयोजित धर्म सभा में उपस्थित संतों ने महंती गद्दी के महत्व पर प्रकाश डाला। महामंडलेश्वरों ने कहा कि सनातन धर्म में महंती का पद कोई भौतिक पदवी नहीं है, बल्कि यह निरंतर सेवा, त्याग और धर्म की रक्षा करने का एक कठिन संकल्प है। इस साधना पथ पर चलते हुए महंत को समाज का मार्गदर्शन करना होता है।
मंच पर विराजमान महंत गोपालदास बंगरा, महंत रघुनाथदास (रामलला मंदिर कोंच), और महंत अशोक दास (बड़ी माता मंदिर) ने सामूहिक रूप से पं. संदीप शाण्डिल्य को चादर ओढ़ाकर और आशीर्वाद देकर गद्दी पर आसीन किया। संतों ने विश्वास जताया कि नवनियुक्त महंत मंदिर की प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करते हुए समाज में आध्यात्मिक चेतना का विस्तार करेंगे।
धर्म रक्षा की सामूहिक जिम्मेदारी
इस गरिमामयी अवसर पर महंत गोविंद दास पचोखरा, महंत अनुरुद्ध दास, और महंत मोहनदास सहित क्षेत्र के अनेक लब्धप्रतिष्ठित संत उपस्थित रहे। संतों ने अपने उद्बोधन में कहा कि मंदिर केवल पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली एक कड़ी हैं। पं. संदीप शाण्डिल्य से अपेक्षा की गई कि वे मंदिर की मर्यादा को अक्षुण्ण रखते हुए युवाओं को धर्म और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करेंगे।
श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब, हुआ महाप्रसाद वितरण
समारोह में कोंच नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से भारी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। स्थानीय नागरिकों ने पं. संदीप शाण्डिल्य का अभिनंदन किया और उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
नगर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध जनों ने इसे कोंच की धार्मिक एकता का प्रतीक बताया। इस दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के लिए मंदिर समिति के स्वयंसेवक मुस्तैद रहे।
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