प्राकृतिक संपदा का संरक्षण समय की मांग: जल और वनों को बचाने के लिए आगे आएं युवा- डॉ. शैलेंद्र द्विवेदी

0
कोंच के अशोक शुक्ला महिला पीजी कॉलेज में NSS शिविर के दौरान छात्राओं को जल और वन संरक्षण की शपथ दिलाते प्राचार्य और शिक्षक

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कोंच (जालौन): वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर गहराते जल संकट और पर्यावरण असंतुलन को देखते हुए अब जमीनी स्तर पर जागरूकता की अत्यंत आवश्यकता है। इसी उद्देश्य के साथ कोंच स्थित अशोक शुक्ला महिला पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के अंतर्गत बुधवार को एक दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को जल संरक्षण और वन रोपण के प्रति न केवल जागरूक किया गया, बल्कि उन्हें समाज में परिवर्तन लाने वाले ‘दूत’ के रूप में कार्य करने की प्रेरणा दी गई।

NSS गीतों के साथ शिविर का भावपूर्ण शुभारंभ

​शिविर का शुभारंभ महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) लक्ष्य गीत से हुआ। संगीत की स्वरलहरियों के बीच स्वयंसेविकाओं ने समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का संकल्प दोहराया। इस दौरान पूरे परिसर का वातावरण उत्साह और ऊर्जा से भर गया। छात्राओं ने गीतों के माध्यम से यह संदेश दिया कि एक जागरूक युवा ही देश की तकदीर बदल सकता है।

जल का अंधाधुंध दोहन चिंता का विषय

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार द्विवेदी ने वर्तमान जल संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “जल ही जीवन है, यह केवल एक नारा नहीं बल्कि भविष्य की कड़वी सच्चाई है। आज के दौर में हम देख रहे हैं कि पानी की बर्बादी बेतहाशा बढ़ गई है।” डॉ. द्विवेदी ने सरकारी नलों और निजी समरसेबल पंपों से होने वाले पानी के दुरुपयोग पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज लोग एक बाल्टी की आवश्यकता होने पर पांच बाल्टी पानी व्यर्थ बहा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि आज हमने जल की एक-एक बूंद की कीमत नहीं समझी, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन दूभर हो जाएगा। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने घरों और मोहल्लों में पानी की बर्बादी रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

स्वच्छ वातावरण के लिए पौधारोपण अनिवार्य

​जल के साथ-साथ वनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्राचार्य ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और घटते वन क्षेत्र के कारण स्वच्छ हवा मिलना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने छात्राओं को निर्देशित किया कि NSS स्वयंसेवक होने के नाते उनका यह कर्तव्य है कि वे अपने घर के आसपास खाली पड़ी भूमि पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं। उन्होंने कहा कि वृक्ष न केवल हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि वर्षा चक्र को बनाए रखने और भूजल स्तर को सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विशेषज्ञों और प्राध्यापकों ने साझा किए विचार

​शिविर में उपस्थित विभिन्न शिक्षाविदों ने भी पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार रखे। यूनिट प्रथम के कार्यक्रम अधिकारी नौशाद अहमद और यूनिट द्वितीय की कार्यक्रम अधिकारी अंजना द्विवेदी ने छात्राओं को NSS के सेवा भाव से अवगत कराया। इसके अलावा डॉ. अखिलेश विक्रम, डॉ. वीरेंद्र त्रिपाठी, धनेंद्र श्रीवास्तव और महेंद्र परिहार ने भी पर्यावरण असंतुलन से होने वाले खतरों के प्रति आगाह किया और व्यावहारिक रूप से पानी बचाने के तरीके साझा किए।

छात्राओं ने लिया संरक्षण का संकल्प

​शिविर के समापन पर छात्राओं ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे न केवल स्वयं जल की बर्बादी रोकेंगी, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी जल संरक्षण और पौधारोपण के प्रति जागरूक करेंगी। इस आयोजन ने छात्राओं में सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को नए आयाम दिए हैं।

Leave a Reply

You may have missed