सहकारी आंदोलन से बदलेगी जालौन की तस्वीर: डीएम ने बी-पैक्स और विशाल अनाज भंडारण योजना की समीक्षा की

उरई (जालौन): जनपद में सहकारी आंदोलन को मात्र एक सरकारी प्रक्रिया न रखकर इसे ग्रामीण स्तर पर एक सशक्त जन-आंदोलन बनाने की कवायद तेज हो गई है। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कमेटी (DCDC) की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य केंद्र सहकारिता के माध्यम से स्वरोजगार सृजन, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और किसानों के लिए विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना को धरातल पर उतारना रहा।
मत्स्य और दुग्ध समितियों का हुआ विस्तार
बैठक में सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता) ने प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले छह महीनों में सहकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं:
- मत्स्य विभाग: मछुआ समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 12 नई समितियों का गठन किया गया है, जिससे जिले में अब कुल 51 मत्स्य समितियां क्रियाशील हो गई हैं। इससे मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को संगठित बाजार और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।
- दुग्ध विकास: श्वेत क्रांति को बढ़ावा देने के लिए जिला योजना के तहत 2 नई समितियां बनी हैं और 3 पुरानी निष्क्रिय समितियों को पुनर्जीवित किया गया है।
- नंद बाबा मिशन: इस महत्वाकांक्षी मिशन के तहत 10 नई सहकारी समितियों का गठन पूरा हो चुका है, जो सीधे तौर पर दुग्ध उत्पादकों के मुनाफे को बढ़ाने का काम करेंगी।
बी-पैक्स (B-PACS) समितियों को सक्रिय करने के निर्देश
जिलाधिकारी ने सहकारिता विभाग द्वारा गठित 09 नई बी-पैक्स समितियों का औपचारिक अनुमोदन किया। जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए कि इन समितियों को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इन्हें तत्काल धरातल पर क्रियाशील किया जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग और ऋण की सुविधाएं सुलभ हो सकें।
विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना: जालौन का चयन
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु अन्न भंडारण क्षमता में विस्तार रहा। सहकारिता विभाग की ‘विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना’ के तहत जनपद के तीन प्रमुख स्थलों का चयन किया गया है:
- बी-पैक्स लिमिटेड कैलिया
- बी-पैक्स लिमिटेड नदीगांव
- क्रय-विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड उरई
इन स्थलों पर 500 मीट्रिक टन या उससे अधिक क्षमता के अत्याधुनिक गोदामों का निर्माण किया जाएगा। जिलाधिकारी ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर इन जमीनों का अनुमोदन करते हुए कहा कि इन गोदामों के बनने से जनपद में विशेषकर दलहन और तिलहन फसलों के भंडारण की समस्या समाप्त हो जाएगी। इससे किसान अपनी उपज को सुरक्षित रख सकेंगे और बाजार में सही दाम मिलने पर उसे बेच पाएंगे।
प्रशासनिक उपस्थिति और निर्देश
जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) केके सिंह और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं की समय-सीमा तय की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। बैठक में एडीएम (वित्त एवं राजस्व) संजय कुमार, एआर कोऑपरेटिव विजय कुमार वर्मा और जिला कृषि अधिकारी गौरव यादव सहित अन्य विभागों के अध्यक्ष मौजूद रहे।
निष्कर्ष:
सहकारिता विभाग की इन योजनाओं से जालौन का किसान अब केवल उत्पादक नहीं बल्कि एक उद्यमी के रूप में उभरेगा। भंडारण की सुविधा और समितियों का नेटवर्क बिचौलियों की भूमिका को खत्म कर सीधे किसानों की जेब तक लाभ पहुंचाएगा।
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