जालौन: न्याय न मिलने पर पंचायत सहायक ने मांगी ‘इच्छामृत्यु’, राष्ट्रपति को पत्र भेजकर ग्राम विकास अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप

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जालौन के कोंच में पीड़ित पंचायत सहायक अंकित सिंह द्वारा राष्ट्रपति को भेजा गया शिकायती पत्र, जिसमें ग्राम विकास अधिकारी पर उत्पीड़न के आरोप और इच्छामृत्यु की मांग का उल्लेख है

रिपोर्ट : राहुल,जालौन। UP SAMVAD

कोंच (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कोंच विकास खंड से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यशैली से त्रस्त होकर एक सरकारी कर्मी ने मौत की गुहार लगाई है। चमेंड गांव के पंचायत सहायक अंकित सिंह ने ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और एक सुपरवाइजर पर मानसिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाते हुए महामहिम राष्ट्रपति को पत्र प्रेषित किया है। पत्र में अंकित ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि उसे इस प्रताड़ना से न्याय नहीं मिला, तो उसे ‘इच्छामृत्यु’ की अनुमति प्रदान की जाए।

वोट काटने और बढ़ाने के खेल में प्रताड़ना का आरोप

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, चमेंड निवासी अंकित सिंह पुत्र फूलसिंह गांव में पंचायत सहायक के पद पर तैनात है। वर्तमान में निर्वाचन संबंधी कार्यों के चलते वह बीएलओ (BLO) की जिम्मेदारी भी निभा रहा है। अंकित का आरोप है कि एसआईआर (SIR) कार्य के दौरान वोट काटने और बढ़ाने के नाम पर उन पर अनैतिक दबाव बनाया जा रहा है।

​अंकित ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और सहायक अध्यापक (सुपरवाइजर) द्वारा उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। पीड़ित का कहना है कि उसे उन कार्यों के लिए दोषी ठहराया जा रहा है जो नियम विरुद्ध हैं, जिसके कारण वह भारी मानसिक तनाव और अवसाद के दौर से गुजर रहा है।

प्रशासनिक तंत्र पर उठते गंभीर सवाल

​यह मामला केवल एक कर्मचारी के उत्पीड़न का नहीं है, बल्कि सरकारी विभागों के भीतर चल रहे कथित ‘नेक्सस’ की ओर भी इशारा करता है। पंचायत सहायक का कहना है कि जब एक कर्मचारी अपने कर्तव्य का निर्वहन ईमानदारी से करना चाहता है, तो उच्च पदस्थ अधिकारी या सुपरवाइजर स्तर के लोग अपने हितों के लिए उस पर दबाव बनाते हैं।

​पत्र में अंकित ने मार्मिक अपील करते हुए लिखा है:

​”मैं अपने पद के दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूँ, लेकिन वोट घटाने-बढ़ाने के गलत खेल में मुझे मोहरा बनाया जा रहा है। प्रताड़ना इस हद तक बढ़ गई है कि अब जीना दूभर हो गया है।”

इच्छामृत्यु की मांग से हड़कंप

​एक सरकारी सेवक द्वारा देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद (राष्ट्रपति) को पत्र लिखकर ‘इच्छामृत्यु’ मांगना प्रशासन की विफलता का बड़ा संकेत है। इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद विकास खंड कोंच से लेकर जिला मुख्यालय तक हड़कंप मच गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अंकित एक मेहनती युवक है और इस तरह के कदम उठाने के पीछे निश्चित रूप से कोई बड़ी मानसिक पीड़ा रही होगी।

न्याय की गुहार और भविष्य की चेतावनी

​अंकित सिंह ने महामहिम राष्ट्रपति से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। पीड़ित ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि उसे समय रहते न्याय नहीं मिला और उसे इस मानसिक नरक से मुक्ति नहीं मिली, तो उसके पास जीवन समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

​फिलहाल, इस मामले में अभी तक संबंधित ग्राम विकास अधिकारी या विकास खंड के उच्च अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब देखना यह होगा कि राष्ट्रपति भवन या प्रदेश शासन इस गंभीर शिकायत पर क्या संज्ञान लेता है।

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