​जालौन: खाकी पर उठे सवाल! 11 वर्षीय मासूम से अन्याय के मामले में पुलिस पर दबंगों से मिलीभगत का आरोप, न्याय के लिए एसपी की चौखट पर पिता

0
जालौन जिले के कोल्ड स्टोरेज के लिए प्रशासन द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देश

कोंच/नदीगांव (जालौन): जनपद के नदीगांव थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और ‘मित्र पुलिस’ के दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां सरकार महिला सुरक्षा और मासूमों के संरक्षण के लिए कड़े कानून बना रही है, वहीं दूसरी ओर एक बेबस पिता अपनी 11 वर्षीय मासूम बेटी के लिए न्याय की गुहार लगाते हुए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। पीड़ित पिता का आरोप है कि स्थानीय पुलिस आरोपियों के साथ मिलकर मामले को दबाने और उसे कमजोर करने की साजिश रच रही है।

क्या है पूरा मामला?

​घटना की शुरुआत 12 जनवरी की दरमियानी रात से होती है। नदीगांव थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक (SP) को सौंपे गए शिकायती पत्र में बताया कि उसकी 11 साल की मासूम बेटी रात में घर पर सो रही थी। भीषण ठंड की उस रात जब सुबह करीब 5 बजे पिता की आंख खुली, तो उसके होश उड़ गए—बेटी अपने बिस्तर पर नहीं थी। बदहवास पिता ने गांव और आसपास खोजबीन शुरू की। जल्द ही उसे पता चला कि गांव में स्थित एक मटर प्लांट पर काम करने वाले दो युवक उसकी मासूम पुत्री को बहला-फुसलाकर वहां ले गए हैं।

प्लांट से भगाया, थाने में बिछाया ‘समझौते’ का जाल

​पीड़ित का आरोप है कि जब वह अपनी बेटी की तलाश में उक्त मटर प्लांट पर पहुंचा, तो वहां मौजूद रसूखदार लोगों और दबंगों ने उसे धमकाकर वहां से भगा दिया। हारकर पीड़ित न्याय की उम्मीद में नदीगांव थाने पहुंचा। पिता का आरोप है कि यहां पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय खेल शुरू कर दिया। पुलिस ने उसके छोटे भाई से एक प्रार्थना पत्र लिखवाया और उसे बिना पढ़कर सुनाए ही अपने पास रख लिया।

​बाद में पुलिस ने मटर प्लांट पर छापेमारी कर किशोरी और दो युवकों को बरामद तो कर लिया, लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू हुई। पीड़ित पिता का कहना है कि बरामदगी के बाद उसे उसकी अपनी बेटी से मिलने तक नहीं दिया गया। उसे थाने से दूर रखा गया और पुलिसकर्मी लगातार उस पर इस बात का दबाव बनाने लगे कि वह ‘बड़े लोगों’ से पंगा न ले और मामले में समझौता कर ले।

एफआईआर की धाराओं पर संदेह का घेरा

​हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने इस मामले में 35 वर्षीय एक युवक के खिलाफ महज ‘बहला-फुसलाकर ले जाने’ (धारा 363) का मुकदमा दर्ज किया है। पिता की शिकायत और घटना की परिस्थितियों को देखते हुए यह आरोप लग रहे हैं कि पुलिस ने जानबूझकर मामले को हल्का बनाया है। 11 साल की बच्ची को रात के अंधेरे में प्लांट पर ले जाना और वहां बंधक बनाकर रखना किसी बड़े अपराध की ओर इशारा करता है, लेकिन पुलिस की एफआईआर और पिता के बयानों में जमीन-आसमान का अंतर दिख रहा है।

एसपी से निष्पक्ष जांच की गुहार

​नदीगांव पुलिस की कार्यशैली से हताश होकर पीड़ित पिता ने बुधवार को पुलिस अधीक्षक जालौन की शरण ली। उसने आरोप लगाया कि:

  • ​थाना पुलिस और मटर प्लांट के दबंगों के बीच साठगांठ है।
  • ​पीड़ित परिवार को डराया-धमकाया जा रहा है ताकि वे शिकायत वापस ले लें।
  • ​मासूम बच्ची को परिवार से दूर रखकर उस पर भी दबाव डाला जा रहा है।

​पीड़ित ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी उच्च अधिकारी से कराई जाए और आरोपियों के साथ-साथ दोषी पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हो। अब देखना यह है कि क्या एसपी कार्यालय से इस गरीब पिता को न्याय मिलता है या खाकी के रसूख के आगे एक मासूम की चीख दबकर रह जाएगी।

रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, जालौन |UP SAMVAD
Source: Local Sources

About The Author

Leave a Reply

You may have missed