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​जालौन: ग्राम ईश्वरी में अंबेडकर प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद, देर रात प्रशासन ने हटवाई प्रतिमा; भारी पुलिस बल तैनात

नदीगांव के ग्राम ईश्वरी में चबूतरे पर स्थापित बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा

​नदीगांव(कोंच): जनपद के नदीगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम घिलौर के मजरा ईश्वरी में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना और उसके अनावरण को लेकर छिड़ा विवाद अब चरम पर पहुँच गया है। मंगलवार की देर रात जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए आयोजकों के भारी विरोध के बीच मौके से प्रतिमा हटवा दी है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने प्रतिमा को फिलहाल पुलिस की सुपुर्दगी में नदीगांव थाने में रखवा दिया है। पूरे गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस और पीएसी (PAC) के जवान तैनात कर दिए गए हैं।

​क्या है विवाद की मुख्य जड़?

​मामले की शुरुआत कुछ समय पहले हुई थी, जब ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित ग्राम सभा की बैठक में गांव की परती भूमि पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। प्रस्ताव के बाद 20 दिसंबर से चयनित भूमि पर चबूतरे का निर्माण शुरू हुआ और कार्य पूर्ण होने के बाद वहां प्रतिमा भी रख दी गई थी।

​आयोजकों ने पहले 1 जनवरी को अनावरण की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में इसे बदलकर 13 जनवरी (मंगलवार) तय किया गया। इस बीच, 8 जनवरी को ग्राम प्रधान ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में अनावरण और शोभायात्रा की अनुमति हेतु आवेदन भी किया। विवाद तब शुरू हुआ जब सोमवार की रात गांव के ही कुछ अन्य ग्रामीणों ने इस प्रतिमा स्थापना का विरोध करते हुए उच्चाधिकारियों से शिकायत कर दी कि यह कार्य बिना विधिवत प्रशासनिक अनुमति के किया जा रहा है।

​प्रशासनिक हस्तक्षेप और दिनभर का ड्रामा

​मंगलवार सुबह जैसे ही अनावरण कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हुईं, गांव में तनावपूर्ण हालात बन गए। सूचना मिलते ही एसडीएम ज्योति सिंह, क्षेत्राधिकारी (CO) परमेश्वर प्रसाद और थानाध्यक्ष शशिकांत चौहान भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक या सरकारी भूमि पर बिना जिलाधिकारी की अनुमति के प्रतिमा स्थापित करना नियम विरुद्ध है।

​प्रशासनिक रोक के बाद कार्यक्रम आयोजक और भीम आर्मी से जुड़े लोग उग्र हो गए और वहीं बैठकर नारेबाजी करने लगे। अधिकारियों ने घंटों तक लोगों को समझाने का प्रयास किया कि वे स्वयं प्रतिमा हटा लें, लेकिन आयोजक पक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा।

​देर रात की कार्रवाई और सुरक्षा इंतजाम

​दिनभर चली खींचतान और वार्ता विफल होने के बाद, प्रशासन ने रात के अंधेरे में शांति-व्यवस्था बनाए रखने हेतु सख्त कदम उठाया। पुलिस ने आयोजकों के विरोध को दरकिनार कर प्रतिमा को चबूतरे से हटवाया और सुरक्षित थाने पहुँचाया। गांव में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए एहतियातन पीएसी बल की टुकड़ी तैनात कर दी गई है।

​क्षेत्राधिकारी परमेश्वर प्रसाद ने बताया:

​”प्रतिमा स्थापना के लिए अनिवार्य वैधानिक अनुमति नहीं ली गई थी। सरकारी भूमि पर बिना अनुमति के कोई भी निर्माण या स्थापना अवैध है। वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पुलिस बल गांव में पैनी नजर बनाए हुए है। जब तक प्रशासन से विधिवत अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक प्रतिमा स्थापना की अनुमति नहीं दी जाएगी।”

​आयोजकों का पक्ष

​वहीं, ग्राम प्रधान और भीम आर्मी के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर ही यह कार्य किया था और अनुमति के लिए पहले ही आवेदन दे दिया था। उनका आरोप है कि कुछ लोगों के दबाव में आकर प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। फिलहाल, इस घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और प्रशासन किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों से संवाद कर रहा है।

रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, जालौन |UP SAMVAD
Source: Local Sources

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