जालौन में खनन माफियाओं का तांडव: अवैध गड्ढे भरने का विरोध करने पर मां-बेटे को घर में घुसकर पीटा, ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
कोंच (जालौन): जनपद जालौन में मिट्टी खनन माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें अब न तो कानून का खौफ है और न ही खाकी का डर। ताजा मामला कोंच कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम दिरावटी से सामने आया है, जहाँ दबंग खनन माफियाओं ने न केवल एक महिला और उसके बेटे के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की, बल्कि उन्हें ट्रैक्टर से कुचलकर जान से मारने की कोशिश भी की। इस घटना ने क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विरोध करने पर घर में घुसकर किया हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिरावटी गांव में खनन माफियाओं द्वारा किए गए अवैध खनन के कारण पीड़ित परिवार के घर के बाहर गहरे और खतरनाक गड्ढे हो गए थे। इन गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता था। जब पीड़ित महिला और उसके बेटे ने इन गड्ढों में मिट्टी डालकर उन्हें भरने का प्रयास किया, तो गांव के ही दबंग खनन माफिया वहां पहुंच गए। माफियाओं ने सार्वजनिक रूप से गाली-गलौज शुरू कर दी और जब पीड़ित पक्ष ने इसका विरोध किया, तो दबंगों ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं।
चश्मदीदों के मुताबिक, दबंगों ने घर के भीतर घुसकर महिला और उसके बेटे पर हमला बोल दिया। मां-बेटे को लात-घूसों से बेरहमी से पीटा गया। इतना ही नहीं, जब पीड़ित खुद को बचाने के लिए आगे आए, तो माफियाओं ने अपना ट्रैक्टर चढ़ाकर उन्हें कुचलने का प्रयास किया। गनीमत रही कि पीड़ितों ने समय रहते भागकर अपनी जान बचाई।
पुलिस की शिथिलता पर उठे सवाल
इस खौफनाक मंजर के बाद पीड़ित परिवार लहूलुहान हालत में न्याय की गुहार लेकर कोंच कोतवाली पहुंचा। पीड़ितों का आरोप है कि घटना की लिखित शिकायत देने के बाद भी पुलिस का रवैया बेहद उदासीन रहा। पीड़ित परिवार कई घंटों तक थाने के बाहर बैठा रहा, लेकिन स्थानीय पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ तत्काल कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि खनन माफियाओं की सत्ता और पुलिस में गहरी पैठ है, जिसके कारण उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। दबंगों ने पुलिस से शिकायत करने पर परिवार को गांव में न रहने देने और जान से मारने की धमकी भी दी है।
खनन माफियाओं का बढ़ता जाल
जालौन का कोंच क्षेत्र पिछले लंबे समय से अवैध मिट्टी और बालू खनन का केंद्र बना हुआ है। सूत्रों की मानें तो रात के अंधेरे के साथ-साथ अब दिनदहाड़े भी सरकारी जमीनों और निजी खेतों से मिट्टी का अवैध उठान किया जा रहा है। इन माफियाओं को स्थानीय रसूखदारों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते ये आम नागरिकों के साथ हिंसा करने से भी नहीं हिचकते। दिरावटी की यह घटना केवल एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासन के उन दावों की पोल खोलती है जिसमें ‘अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश’ की बात की जाती है।
प्रशासनिक चुप्पी
फिलहाल, पीड़ित परिवार गहरे सदमे और भय में है। घर की महिला सदस्य ने बताया कि दबंगों के डर से अब वे अपने ही घर में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। यदि समय रहते पुलिस ने इन चिन्हित माफियाओं पर कठोर कार्रवाई नहीं की, तो दिरावटी गांव में कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजते हैं या खनन माफियाओं का यह खूनी खेल बदस्तूर जारी रहेगा।






