बुद्धं शरणं गच्छामि: उरई में बुद्ध जयंती पर उमड़ा आस्था का सैलाब, शांति और करुणा के संदेश से गुंजायमान हुआ जालौन

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उरई के डॉ. अंबेडकर चौराहे पर बुद्ध जयंती के अवसर पर आयोजित खीरदान कार्यक्रम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और पुष्प अर्पित करते गणमान्य नागरिक

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई (जालौन): जनपद जालौन की हृदयस्थली उरई में शुक्रवार को तथागत भगवान बुद्ध की जयंती अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और धम्ममय वातावरण में मनाई गई। शांति, अहिंसा और वैश्विक करुणा के प्रणेता गौतम बुद्ध के प्राकट्य दिवस पर पूरा शहर सफेद ध्वजों और ‘नमो बुद्धाय’ के जयघोष से सराबोर नजर आया। इस पावन अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसने न केवल धार्मिक आस्था को प्रदर्शित किया बल्कि सामाजिक एकजुटता की एक नई इबारत भी लिखी।

अंबेडकर चौराहे पर धम्म ज्ञान और सेवा का संगम

​दिन का मुख्य और भव्य आयोजन नगर के व्यस्ततम डॉ. अंबेडकर चौराहे पर संपन्न हुआ। ‘बहुजन नायक/महानायक जन्मोत्सव आयोजन संयुक्त समिति’ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में ‘खीरदान एवं धम्म ज्ञान उत्सव’ का आयोजन किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं और बौद्ध अनुयायियों का तांता डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा और बुद्ध की झांकी के समक्ष जुटना शुरू हो गया था। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ तथागत बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। उपस्थित जनसमूह ने सामूहिक रूप से बुद्ध वंदना की और शांति का संकल्प लिया।

बौद्ध दर्शन की प्रासंगिकता पर विद्वानों का मंथन

​आयोजन के दौरान आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने भगवान बुद्ध के सिद्धांतों को आधुनिक समाज की विसंगतियों का एकमात्र समाधान बताया। बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि बुद्ध केवल एक संप्रदाय के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के मार्गदर्शक हैं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा:

​”आज के दौर में जब विश्व युद्ध और नफरत की आग में झुलस रहा है, तब बुद्ध का ‘अहिंसा परमो धर्म:’ और ‘अप्प दीपो भव’ का संदेश ही शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी इसी धम्म के माध्यम से समाज में समता और बंधुत्व लाने का स्वप्न देखा था।”

भीषण गर्मी पर भारी पड़ा श्रद्धा का उत्साह

​मई की चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। राहगीरों और भक्तों के लिए विशेष रूप से ठंडी खीर और शीतल जल का प्रबंध किया गया था। सेवाभाव का आलम यह था कि समाज के हर वर्ग के लोगों ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन जाति और पंथ की सीमाओं को तोड़कर एक समरस समाज की झांकी प्रस्तुत करता नजर आया।

आयोजन समिति और गणमान्य जनों की सक्रियता

​इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में जिलाध्यक्ष अवधेश गौतम के नेतृत्व में पूरी टीम ने जी-जान से मेहनत की। व्यवस्थाओं को सुचारू रखने में विजय रत्न, सुधाकर राव, दीपेंद्र सिंह, दीपक गौतम, महेंद्र दोहरे, रमाकांत दोहरे, किशन बाबू, प्रवेन्द्र पाल सिंह, चंद्रशेखर, राजेंद्र पाल और शैलेंद्र अहिरवार का विशेष सहयोग रहा।

​वहीं, सेवा स्टालों पर महिलाओं और युवाओं ने मोर्चा संभाला। ऊषा सिंह, सुनीता रत्न, अनुराधा कठेरिया, कल्पना और साधना जैसी महिलाओं ने भीषण गर्मी के बीच निरंतर श्रद्धालुओं की सेवा की। इस दौरान मिथुन कुमार, भगवतीशरण पांचाल, पूर्व सांसद अरविंद खाबरी, अतुल अहिरवार, महेंद्र भाटिया, अमरजूलाल गौतम, और शालिनी बौद्ध सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

शांति और समता का संदेश

​देर शाम तक चले इस कार्यक्रम ने उरई नगरी को आध्यात्मिक शांति के रंग में रंग दिया। अंत में सभी उपस्थित जनों ने संकल्प लिया कि वे बुद्ध के बताए ‘अष्टांगिक मार्ग’ पर चलकर समाज में शिक्षा, समता और भाईचारे का प्रसार करेंगे। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक उत्सव रहा, बल्कि इसने जालौन जिले में सामाजिक चेतना की एक नई लौ प्रज्वलित की है।

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