प्रशासनिक चाबुक: जालौन में कार्यों में लापरवाही पर सचिव पवन तिवारी सस्पेंड, सीडीओ की कड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

0
जालौन विकास भवन का बाहरी दृश्य जहाँ मुख्य विकास अधिकारी के आदेश पर सचिव के निलंबन की कार्रवाई की गई

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई(जालौन) : उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत प्रशासनिक कार्यों में शिथिलता बरतने वालों पर गाज गिरना जारी है। इसी क्रम में जनपद जालौन के उरई स्थित विकास भवन कार्यालय से एक बड़ी खबर सामने आई है। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने विकासखंड जालौन के अंतर्गत ग्राम पहाड़पुरा और अकोड़ी दुबे में तैनात ग्राम विकास सचिव पवन तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सचिव पर यह कार्रवाई लगातार मिल रही शिकायतों और नोडल अधिकारी के निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित रहने के चलते की गई है।

नोडल अधिकारी के निरीक्षण में खुली पोल

​मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब शासन द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह जनपद के औचक निरीक्षण पर थे, तब सचिव पवन तिवारी अपने कार्यक्षेत्र से नदारद पाए गए। एक वरिष्ठ अधिकारी के आगमन पर बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहना अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना गया। इस घटना ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद मुख्य विकास अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया।

जनहित कार्यों में घोर लापरवाही

​जांच में यह तथ्य सामने आया कि सचिव पवन तिवारी के विरुद्ध लंबे समय से ग्रामीणों और जनप्रतनधियों की शिकायतें मिल रही थीं। उन पर मुख्य रूप से निम्नलिखित आरोप हैं:

  • पेयजल आपूर्ति में उदासीनता: भीषण गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुनिश्चित करना प्राथमिकता है, लेकिन सचिव ने पानी की टंकियों का नियमित निरीक्षण नहीं किया।
  • पेंशन लाभार्थियों का अटका सर्वे: सामाजिक कल्याण योजनाओं के तहत पेंशन लाभार्थियों की सर्वे रिपोर्ट समय से शासन को नहीं भेजी गई, जिससे पात्र लाभार्थी लाभ से वंचित रह गए।
  • क्षेत्र से दूरी: सचिव के बारे में यह शिकायत आम थी कि वे अपने आवंटित गांवों (पहाड़पुरा और अकोड़ी दुबे) में भ्रमण पर नहीं जाते थे, जिससे विकास कार्य ठप पड़े थे।

विकास भवन में हड़कंप, जांच के आदेश

​मुख्य विकास अधिकारी ने निलंबन की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़ी योजनाओं (जैसे जल जीवन मिशन और समाज कल्याण) में देरी करना अक्षम्य अपराध है। इस कार्रवाई के बाद विकास भवन के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप का माहौल है। विभाग ने अब इस मामले की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी है ताकि सचिव के कार्यकाल के दौरान हुई अन्य अनियमितताओं का भी पता लगाया जा सके।

जवाबदेही तय करना जरूरी

​जालौन प्रशासन की यह कार्रवाई अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है। ग्रामीण विकास की धुरी माने जाने वाले ‘सचिव’ पद पर तैनात व्यक्ति की लापरवाही सीधे तौर पर अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को प्रभावित करती है। अब देखना यह होगा कि इस कार्रवाई के बाद जिले की विकास योजनाओं की रफ्तार में कितना सुधार आता है।

Leave a Reply

You may have missed