जालौन: किशोर हत्याकांड में SP का बड़ा हंटर; कोतवाल समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित, विभाग में मचा हड़कंप

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जनपद के बहुचर्चित माधौगढ़ किशोर अपहरण एवं हत्या मामले में पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए विभाग के भीतर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। मामले में घोर लापरवाही, संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में आए माधौगढ़ कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक (SHO) विकेश बाबू सहित तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। एसपी की इस सख्त कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
क्या था पूरा मामला: अपहरण से हत्या तक का खौफनाक सफर
घटना की शुरुआत 25 मार्च को हुई थी, जब ग्राम रुदपुरा निवासी परमाल सिंह का 16 वर्षीय पुत्र कमल प्रताप सिंह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों के अनुसार, कमल अपने ही गांव के दो दोस्तों—रोहित याज्ञिक और तेज प्रताप से मिलने की बात कहकर घर से निकला था। लेकिन जब वह देर शाम तक वापस नहीं लौटा, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई।
हैरतअंगेज बात यह रही कि अपहरणकर्ताओं ने कमल के ही मोबाइल नंबर से उसकी मां के फोन पर संदेश भेजकर 30 लाख रुपये की मोटी फिरौती की मांग की। अपहरण की इस सनसनीखेज वारदात ने इलाके में दहशत फैला दी। परिजनों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद 27 मार्च को माधौगढ़ कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई।
खुलासा: पशुबाड़े में बोरे में बंद मिली लाश
पुलिस की सघन जांच और सर्विलांस की मदद से जब संदेही रोहित को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने जो सच उगला वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। आरोपी रोहित ने स्वीकार किया कि उन्होंने कमल प्रताप की हत्या कर दी है। हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को एक बोरे में भरकर घर के समीप बने पशुबाड़े में मिट्टी में दबा दिया गया था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर मौके से किशोर का शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
मुठभेड़ और आरोपियों की गिरफ्तारी
मामले में उस वक्त नया मोड़ आया जब पुलिस टीम आरोपियों को हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद कराने के लिए ले जा रही थी। इसी दौरान आरोपियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर भागने का प्रयास किया। आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी कार्रवाई में मुख्य आरोपी रोहित के पैर में गोली लगी, जिससे वह घायल हो गया। वहीं, दूसरे आरोपी तेज प्रताप ने घेराबंदी देख मौके पर ही आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल और SP की कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि पुलिस ने शुरुआत में सक्रियता दिखाई होती, तो शायद कमल की जान बचाई जा सकती थी। पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह द्वारा की गई आंतरिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
- प्रभारी निरीक्षक विकेश बाबू: मामले की गंभीरता को समझने में पूरी तरह विफल रहे और जांच में तत्परता नहीं दिखाई।
- उप निरीक्षक रामऔतार सिंह: जांच में सामने आया कि उन्होंने मामले के निपटारे या कार्रवाई के नाम पर कथित रूप से रुपयों की मांग की थी।
- दीवान (कांस्टेबल): एक दीवान पर पीड़ित परिजनों को गुमराह करने और आरोपियों को अप्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने के गंभीर आरोप लगे।
इन अनियमितताओं और कर्तव्य के प्रति लापरवाही को अक्षम्य मानते हुए, एसपी विनय कुमार सिंह ने शनिवार रात तीनों को सस्पेंड कर दिया।
प्रशासनिक संदेश: लापरवाही बर्दाश्त नहीं
पुलिस अधीक्षक ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अपराधियों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा, “जनता की सुरक्षा और न्याय से खिलवाड़ करने वाले किसी भी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। वर्दी की गरिमा सर्वोपरि है और भ्रष्टाचार या लापरवाही की विभाग में कोई जगह नहीं है।”
फिलहाल, इस कार्रवाई ने अन्य थानों के प्रभारियों को भी कड़ा संदेश दिया है कि पीड़ितों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई न करना अब भारी पड़ सकता है। माधौगढ़ क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस बल तैनात है।







