जालौन: जल जीवन मिशन में ढिलाई पर डीएम सख्त, कार्यदायी संस्थाओं को अनुबंध निरस्त करने की चेतावनी

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जालौन कलेक्ट्रेट सभागार में जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करते डीएम राजेश कुमार पाण्डेय और उपस्थित अधिकारी

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई (जालौन): जनपद में महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ के क्रियान्वयन में हो रही देरी और सड़कों की बदहाली को लेकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्थाओं की कार्यशैली पर न केवल नाराजगी जताई, बल्कि स्पष्ट रूप से अल्टीमेटम दिया कि यदि मई माह तक निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं हुए, तो संबंधित कंपनियों के अनुबंध निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

सड़क मरम्मत में लापरवाही पर जिलाधिकारी का कड़ा प्रहार

​समीक्षा बैठक के दौरान जो सबसे गंभीर मुद्दा उभरकर सामने आया, वह है पाइपलाइन बिछाने के बाद खोदी गई सड़कों की बदहाली। आंकड़ों के अनुसार, जनपद में योजना के तहत लगभग 1600 किलोमीटर सड़कों की खुदाई की गई थी। हालांकि अधिकांश कार्य पूरा बताया जा रहा है, लेकिन अब भी 264 ग्राम पंचायतों में करीब 240 किलोमीटर सड़क का पुनर्निर्माण (Road Restoration) लंबित है।

​जिलाधिकारी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों को उनके मूल स्वरूप में न लाना जनता के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। उन्होंने GVPR और BGCC जैसी कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया कि शेष सड़कों का निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से तत्काल पूर्ण किया जाए। इसमें किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय की जाएगी।

26 गांवों में जलापूर्ति ठप: ‘मैनपावर बढ़ाएं या कार्रवाई झेलें’

​योजना की प्रगति की बारीकी से जांच करते हुए यह तथ्य सामने आया कि GVPR के अंतर्गत आने वाले 212 गांवों में से 26 गांव ऐसे हैं, जहां बुनियादी ढांचा तैयार होने के बावजूद अब तक पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। जिलाधिकारी ने इसे शासन की प्राथमिकताओं का उल्लंघन करार दिया।

​उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि इन लंबित गांवों में ‘वॉर फुटिंग’ (युद्ध स्तर) पर कार्य किया जाए। डीएम ने स्पष्ट कहा, “यदि आवश्यक हो तो मानव संसाधन (Manpower) बढ़ाएं, लेकिन हर घर तक पानी पहुंचना सुनिश्चित करें।” साथ ही, जहां पाइपलाइन में लीकेज या तकनीकी बाधाएं हैं, वहां विशेष अभियान चलाकर उन्हें दुरुस्त करने के आदेश दिए गए।

बिजली आपूर्ति का बनेगा रोस्टर, पॉइंट पर दर्ज होंगे घंटे

​पेयजल आपूर्ति में विद्युत बाधा को दूर करने के लिए डीएम ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने अधिशासी अभियंता (विद्युत) को निर्देश दिए कि सभी सी.डब्ल्यू.आर (CWR) पॉइंट्स पर रोस्टर के अनुसार निर्बाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने प्रत्येक पॉइंट पर प्रतिदिन होने वाली विद्युत आपूर्ति के घंटों को स्पष्ट रूप से अंकित करने के निर्देश दिए, ताकि जलापूर्ति बाधित होने का कोई बहाना न रहे।

अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण के कड़े निर्देश

​जिलाधिकारी ने केवल रिपोर्ट पर निर्भर न रहकर भौतिक सत्यापन पर जोर दिया है। उन्होंने अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे), सभी उपजिलाधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों (BDO) को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से गांवों का स्थलीय निरीक्षण करें। उन्होंने अभियंताओं के शिथिल पर्यवेक्षण (Loose Supervision) पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकारी केवल कार्यालयों में न बैठें, बल्कि धरातल पर उतरकर व्यवस्था का आकलन करें।

उपस्थिति

​इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद मौर्य, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व उपजिलाधिकारी नेहा ब्याडवाल, अधिशासी अभियंता अंचल गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी और कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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