मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की समीक्षा में बिफरे जिलाधिकारी: फिसड्डी बैंकों पर गिरेगी गाज, लापरवाही बरतने वाले बैंकर्स पर कार्रवाई तय

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई (जालौन): उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना’ को लेकर जालौन प्रशासन बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। जनपद में युवाओं को स्वावलंबी बनाने की राह में रोड़ा बन रहे बैंकों के खिलाफ जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने ऋण वितरण में बरती जा रही शिथिलता पर न केवल नाराजगी जाहिर की, बल्कि लक्ष्य के सापेक्ष खराब प्रदर्शन करने वाले बैंक प्रबंधकों को अंतिम चेतावनी भी जारी कर दी है।
आंकड़ों ने खोली बैंकिंग प्रणाली की पोल
समीक्षा बैठक के दौरान जो आंकड़े सामने आए, वे चौंकाने वाले और चिंताजनक हैं। जनपद को आवंटित 1700 के लक्ष्य के सापेक्ष विभाग द्वारा 3744 आवेदन बैंकों को प्रेषित किए गए थे। भारी संख्या में आवेदन होने के बावजूद, बैंकों ने मात्र 1551 आवेदनों को ही स्वीकृति प्रदान की। इससे भी अधिक गंभीर बात यह रही कि स्वीकृत प्रकरणों में से केवल 1362 मामलों में ही वास्तव में ऋण वितरण (डिस्बर्समेंट) किया गया। जिलाधिकारी ने इस ‘डिस्बर्समेंट गैप’ को शासन की मंशा के विरुद्ध बताते हुए बैंकर्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
निशाने पर कई प्रमुख बैंक, प्रतिकूल प्रविष्टि की चेतावनी
बैठक में बैंकवार डेटा की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि बंधन बैंक, ग्रामीण बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और आईडीबीआई (IDBI) सहित कई अन्य बैंकों का प्रदर्शन अत्यंत निराशाजनक रहा है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत प्रकरणों को लटकाए रखना सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं को बाधित करने जैसा है।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “यदि अगली समीक्षा बैठक तक स्थिति में सुधार नहीं दिखा और डिस्बर्समेंट गैप शून्य नहीं हुआ, तो संबंधित शाखा प्रबंधकों के विरुद्ध न केवल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, बल्कि उनके सेवा अभिलेखों में प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) भी दर्ज की जाएगी।”
अफसरों के ढीले रवैये पर भी जिलाधिकारी सख्त
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय का चाबुक केवल बैंकर्स पर ही नहीं, बल्कि विभागीय अधिकारियों पर भी चला। उन्होंने उपायुक्त उद्योग और एलडीएम (LDM) के ‘शिथिल पर्यवेक्षण’ (Lax Supervision) पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अधिकारियों को केवल फाइलें आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बैंकों से समन्वय कर ऋण वितरण सुनिश्चित कराना उनकी जिम्मेदारी है। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
जिलाधिकारी ने बैठक का समापन करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान का मूल उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। यह योजना प्रदेश की अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए रीढ़ की हड्डी है। इसमें किसी भी स्तर पर मानवीय या प्रक्रियात्मक देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने एलडीएम को निर्देशित किया कि वे सभी बैंकों के साथ समन्वय बिठाकर एक विशेष अभियान चलाएं ताकि लंबित मामलों का तत्काल निस्तारण हो सके।
इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के.के. सिंह, उपायुक्त उद्योग धर्मेंद्र कुमार भास्कर, एलडीएम अनुराग सक्सेना सहित विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि और जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।







