शादी अनुदान योजना: जिलाधिकारी का सख्त निर्देश, पात्रों को न लगाने पड़ें दफ्तरों के चक्कर; लंबित आवेदनों के शीघ्र निस्तारण का आदेश

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कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों के साथ शादी अनुदान योजना की समीक्षा बैठक करते जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई (जालौन) :उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘शादी अनुदान योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए दी जाने वाली यह सहायता राशि बिना किसी बाधा के पात्रों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

लंबित आवेदनों पर जताई नाराजगी, निस्तारण की समयसीमा तय

​कलेक्ट्रेट सभागार में वर्चुअल माध्यम से आयोजित सामान्य, पिछड़ा वर्ग एवं अनुसूचित जाति शादी अनुदान योजना की स्वीकृति समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने विकासखंड और तहसीलवार डेटा की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग के 68 आवेदन तथा अनुसूचित एवं सामान्य वर्ग के 43 आवेदन अभी भी लंबित हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह संख्या क्रमशः 7 और 19 पाई गई।

​जिलाधिकारी ने इन लंबित प्रकरणों पर असंतोष व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि सभी फाइलों का तत्काल निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा, “प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी निर्धन परिवार को अपनी जायज सहायता के लिए सरकारी कार्यालयों की चौखट पर बार-बार न भटकना पड़े।”

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारी-भरकम लक्ष्य निर्धारित

​जिला समाज कल्याण अधिकारी प्रवीण सिंह ने बैठक में वित्तीय रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जनपद में कुल 1617 लाभार्थियों का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस सामाजिक कल्याण कार्य के लिए शासन द्वारा 323.40 लाख रुपये का वित्तीय बजट आवंटित करने का लक्ष्य है।

​अधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक 429 लाभार्थियों के लिए 85.80 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की जा चुकी है, जिसे सीधे पात्रों के खातों में भेजने की प्रक्रिया जारी है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि शेष राशि का उपयोग भी निर्धारित समय के भीतर पारदर्शिता के साथ किया जाए।

पात्रता के कड़े मानक और अनिवार्य शर्तें

​योजना का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे, इसके लिए जिलाधिकारी ने पात्रता मानकों को पुनः दोहराया:

  • आय सीमा: शहरी क्षेत्र के आवेदकों की वार्षिक आय 56,460 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र के लिए 46,080 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • आयु सीमा: विवाह की तिथि पर पुत्री की आयु न्यूनतम 18 वर्ष और वर की आयु 21 वर्ष होनी अनिवार्य है।
  • दस्तावेज: अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आवेदकों के लिए ऑनलाइन निर्गत जाति प्रमाण पत्र का क्रमांक अंकित करना अनिवार्य होगा।
  • प्राथमिकता: पति की मृत्यु के बाद निराश्रित महिलाओं (विधवाओं) और दिव्यांग आवेदकों को वरीयता दी जाएगी।
  • सीमा: एक परिवार की अधिकतम दो पुत्रियों को ही इस योजना का लाभ मिल सकेगा।

डिजिटलीकरण और पारदर्शिता पर जोर

​भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म करने के लिए जिलाधिकारी ने जोर दिया कि सभी आवेदन समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन कर ऑनलाइन ही किए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में जन सेवा केंद्रों और ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएं ताकि कम पढ़े-लिखे लोग भी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया का लाभ उठा सकें।

​बैठक में जनप्रतिनिधियों की भी सक्रिय भागीदारी रही, जिसमें जलशक्ति मंत्री प्रतिनिधि अरविंद चौहान और विधायक कालपी प्रतिनिधि आशुतोष चतुर्वेदी ने भी अपने सुझाव साझा किए। इस अवसर पर परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, जिला विकास अधिकारी निशांत पाण्डेय सहित जिले के अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

​जिला प्रशासन के इस रुख से जिले के गरीब परिवारों में एक नई उम्मीद जगी है कि अब बेटियों के हाथ पीले करने में आर्थिक तंगी आड़े नहीं आएगी।

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