जालौन में जनसेवा रसोई के चार वर्ष पूर्ण: केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. बघेल ने किया चार महान विभूतियों की प्रतिमाओं का भव्य अनावरण; गरीबों की सेवा को बताया सर्वोपरि धर्म

उरई (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद अंतर्गत उरई नगर में संचालित जनसेवा रसोई ने अपनी निरंतरता और परोपकार के गौरवशाली चार वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित एक भव्य और गरिमामयी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री एवं सांसद प्रो. एस.पी. बघेल ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने समाजसेवा, राष्ट्र निर्माण और महापुरुषों के दिखाए आदर्शों पर चलने का पुरजोर आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज के सक्षम, समृद्ध और प्रभावशाली वर्गों का यह परम दायित्व है कि वे अपने सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और धार्मिक कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करें। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद व्यक्तियों की सेवा करना किसी भी संवेदनशील नागरिक का प्राथमिक कर्तव्य होना चाहिए।
जनसेवा रसोई: ‘अक्षय पात्र’ और ‘अन्नपूर्णा भंडार’ की प्रतिमूर्ति
भव्य समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. बघेल ने जनसेवा रसोई के चार वर्ष के सफल और निर्बाध संचालन के लिए आयोजकों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों को हृदय से बधाई दी। उन्होंने इस पुनीत कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि यह रसोई बिना किसी स्वार्थ के निरंतर निर्धन, असहाय, दैनिक श्रमिकों और जरूरतमंद लोगों को अत्यंत पौष्टिक, स्वच्छ और कैलोरी युक्त भोजन उपलब्ध करा रही है। उन्होंने इस अनुपम सेवा की तुलना पौराणिक और धार्मिक संदर्भों से करते हुए इसे “अन्नपूर्णा भंडार” और “अक्षय पात्र” की संज्ञा दी। केंद्रीय मंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि जिस प्रकार मां अन्नपूर्णा का भंडार और अक्षय पात्र कभी खाली नहीं होते, उसी प्रकार ईश्वर की कृपा से यह जनसेवा रसोई भी निरंतर संचालित होती रहे ताकि अधिक से अधिक भूखे और वंचित लोगों तक इसका लाभ सुगमता से पहुंच सके।
सक्षम वर्ग के सहयोग से ही सुदृढ़ होगा सामाजिक ताना-बाना
प्रो. बघेल ने अपने संबोधन में सामाजिक समरसता और सहभागिता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी समाज तभी सशक्त, आत्मनिर्भर और प्रगतिशील बनता है, जब समाज के संपन्न और समर्थ लोग अपनी आय, संसाधन और बहुमूल्य समय का एक निश्चित हिस्सा जनकल्याण व समाजहित के कार्यों में समर्पित करते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि गरीबों, वंचितों और लाचारों की सेवा ही संसार का सबसे बड़ा और सच्चा धर्म है। इस प्रकार के निरंतर प्रयास न केवल समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को संबल प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता के ताने-बाने को भी अत्यधिक मजबूती प्रदान करते हैं।
महान राष्ट्रनायकों एवं लोकमाताओं की प्रतिमाओं का विधिवत अनावरण
इस ऐतिहासिक और मांगलिक अवसर पर देश के चार महान राष्ट्रनायकों और राष्ट्रनिर्माताओं की प्रतिमाओं का पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ अनावरण किया गया। इनमें देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की अप्रतिम वीरांगना झलकारी बाई, भारतीय संविधान के शिल्पकार व भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर तथा मालवा साम्राज्य की न्यायप्रिय लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की भव्य प्रतिमाएं शामिल रहीं। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं केवल पत्थर या धातु के स्मारक मात्र नहीं होतीं, बल्कि वे उनके महान विचारों, जीवन पर्यंत किए गए कड़े संघर्षों और उच्च मानवीय आदर्शों को नई पीढ़ी तक हस्तांतरित करने का एक सशक्त और जीवंत माध्यम होती हैं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यदि हमारा समाज अपने महापुरुषों का सच्चा सम्मान करेगा और उनके बताए मार्ग का अनुसरण करेगा, तभी देश में वास्तविक विकास, सामाजिक न्याय और जन-जागरूकता का सपना साकार हो सकेगा।
संविधान निर्माता और सुशासन के प्रणेता का पावन स्मरण
कार्यक्रम के दौरान देश निर्माण में महापुरुषों के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने देश को एक ऐसा प्रगतिशील और सर्वसमावेशी संविधान दिया, जिसने जाति, धर्म और लिंग के भेद को मिटाकर प्रत्येक नागरिक को समानता, न्याय और मौलिक अधिकार प्रदान कर देश को एकता के सूत्र में पिरोया। इसके साथ ही, देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विराट व्यक्तित्व और कृतित्व को नमन करते हुए उनके सुशासन (Good Governance), लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और राष्ट्रहित में लिए गए कई ऐतिहासिक व साहसिक निर्णयों की जमकर सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि श्रद्धेय वाजपेयी जी का संपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक जीवन सदैव जनसेवा और राष्ट्र की संप्रभुता के लिए समर्पित रहा, और उनका यह अप्रतिम योगदान देश के इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।
मानवता, करुणा और सेवा की अनूठी मिसाल
समारोह में उपस्थित विभिन्न जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने भी जनसेवा रसोई के कार्यों और उसकी पूरी टीम की मुक्त कंठ से सराहना की। उपस्थित जनों ने सामूहिक स्वर में कहा कि यह रसोई केवल जरूरतमंदों का पेट भरने का साधन मात्र नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण समाज में नि:स्वार्थ सेवा, आपसी सहयोग, करुणा, दया और मानवता की पवित्र भावना को धरातल पर मजबूत कर रही है। इस प्रकार की सकारात्मक और परोपकारी पहल समाज के अन्य सामर्थ्यवान लोगों को भी आगे आने और जनकल्याणकारी कार्यों में अपनी आहुति देने के लिए प्रेरित करती है।
समारोह के समापन सत्र में सभी सम्मानित अतिथियों ने आयोजकों को उनके आगामी भविष्य के लिए अनंत मंगलकामनाएं प्रेषित कीं। सभी ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में सेवा का यह पवित्र अभियान और अधिक व्यापक, विस्तृत और सुदृढ़ होगा तथा हजारों-लाखों असहाय व जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई उम्मीद, विश्वास और प्रकाश की किरण लेकर आएगा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी नागरिकों और प्रतिनिधियों ने यह दृढ़ संकल्प लिया कि समाज के कमजोर, गरीब, शोषित और वंचित वर्गों की सेवा के लिए ऐसे उत्कृष्ट जनहितकारी अभियान बिना रुके निरंतर जारी रखे जाएंगे, ताकि जनपद में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए और मानवीय सेवा का यह कारवां लगातार आगे बढ़ता रहे।






