जालौन में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान बनेगा जनआंदोलन, प्रभारी मंत्री संजय गंगवार ने दी हरी झंडी; एक करोड़ से अधिक पौधरोपण का दावा

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उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास मंत्री संजय गंगवार जालौन में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत जन-जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई (जालौन) उत्तर प्रदेश सरकार के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘हरित प्रदेश’ के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन जालौन ने अपनी कमर कस ली है। इसी क्रम में, जनपद के प्रभारी व गन्ना विकास मंत्री संजय गंगवार ने जालौन का दौरा कर “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की व्यापक समीक्षा की। इस महत्वाकांक्षी अभियान को एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से, कैबिनेट मंत्री ने कलेक्ट्रेट परिसर से छह विशेष प्रचार-प्रसार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन जनपद के कोने-कोने, गांवों और कस्बों में जाकर आम जनमानस को पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण के प्रति जागरूक करेंगे।

प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की प्रेरणा से अभियान को गति

​समीक्षा बैठक के उपरांत मीडिया से मुखातिब होते हुए प्रभारी मंत्री संजय गंगवार ने कहा कि यह ऐतिहासिक अभियान देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के ओजस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिव्य प्रेरणा से संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य न केवल जनपद जालौन बल्कि संपूर्ण उत्तर प्रदेश को प्रदूषण मुक्त और हरा-भरा बनाना है। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा, “प्रशासन का यह प्रयास है कि समाज का हर नागरिक अपनी मां के प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करते हुए कम से कम एक पौधा अवश्य रोपे और एक संतान की भांति उसकी देखभाल का संकल्प भी ले।”

लक्ष्य से आगे निकलने की तैयारी: रोपे जाएंगे 1 करोड़ से अधिक पौधे

​विभागीय आंकड़ों और तैयारियों की समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि शासन द्वारा जनपद जालौन को इस वर्ष कुल 98 लाख 12 हजार 400 पौधे लगाने का कड़ा लक्ष्य आवंटित किया गया है। हालांकि, प्रभारी मंत्री और जिला प्रशासन की सूक्ष्म कार्ययोजना व जन उत्साह को देखते हुए अधिकारियों ने पूर्ण विश्वास जताया है कि इस निर्धारित लक्ष्य को न सिर्फ समय से पूर्व प्राप्त कर लिया जाएगा, बल्कि जनपद में इस बार एक करोड़ से भी अधिक पौधों का रोपण कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया जाएगा।

व्यापारियों से लेकर मरीजों तक: हर वर्ग को जोड़ने की अनूठी पहल

​इस महा-अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सर्वव्यापी रूपरेखा है। प्रशासन ने समाज के हर तबके को इस मुहिम का हिस्सा बनाया है:

  • व्यापारी और सामाजिक संगठन: बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक व्यापारी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और एनडीए परिवार के सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • शिक्षा विभाग की बड़ी भूमिका: बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के समन्वय से लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को अपने घरों व आसपास खाली पड़े स्थानों पर पौधरोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
  • परिवहन विभाग की अनूठी अपील: प्रशासन ने परिवहन विभाग के माध्यम से ट्रक चालकों और हाइवे से गुजरने वाले वाहन स्वामियों से भी इस पुनीत कार्य में भागीदारी की अपील की है।
  • स्वास्थ्य विभाग का ‘अनोखा नुस्खा’: स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज को इस अभियान से बेहद रचनात्मक तरीके से जोड़ा गया है। अब अस्पतालों और ओपीडी में आने वाले मरीजों को दवा के पर्चे के साथ-साथ “एक पेड़ मां के नाम” लगाने का संदेश और परामर्श भी दिया जाएगा।

केवल रोपना नहीं, जीवित रखना भी है संकल्प

​कैबिनेट मंत्री संजय गंगवार ने समीक्षा बैठक में कड़े निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाने के लिए पौधे लगाना या कागजी आंकड़े जुटाना नहीं है। सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता पौधों की उत्तरजीविता (Survival Rate) को सुनिश्चित करना है। इसके लिए ‘जियो-टैगिंग’ और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। लोगों को पौधों की जिम्मेदारी लेने, उन्हें पानी देने और उनके ट्री-गार्ड आदि की व्यवस्था करने के लिए लगातार जागरूक किया जाएगा, ताकि यह पर्यावरण संरक्षण अभियान स्थायी रूप से सफल हो सके और आने वाली पीढ़ियों को एक शुद्ध वातावरण मिल सके।

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