जालौन: विकास के दावों की खुली पोल, कीचड़ और दलदल से होकर अंतिम संस्कार करने को मजबूर ग्रामीण

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
कोंच (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में सरकारी दावों और धरातलीय हकीकत का अंतर एक बार फिर खुलकर सामने आया है। जिले की कोंच तहसील अंतर्गत आने वाले असुपुरा गांव में एक ऐसी हृदयविदारक स्थिति देखने को मिल रही है, जो स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। यहां श्मशान घाट तक जाने वाला मुख्य रास्ता बारिश के मौसम में दलदल में तब्दील हो चुका है, जिससे ग्रामीणों के लिए अपने प्रियजनों की अंतिम यात्रा निकालना भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रह गया है।
विधायक निधि से हुआ था निर्माण, लेकिन गुणवत्ता गायब
ग्रामीणों के अनुसार, कुछ समय पूर्व ही विधायक निधि के माध्यम से श्मशान घाट का निर्माण और विकास कार्य कराया गया था। उस समय उम्मीद जगी थी कि अब अंतिम संस्कार के लिए श्मशान तक जाने का मार्ग सुगम होगा। लेकिन निर्माण कार्य के बाद रखरखाव और ड्रेनेज व्यवस्था की अनदेखी का परिणाम आज पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है। पहली ही बारिश में सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि वह अब सड़क न होकर एक खतरनाक दलदल बन गई है।
अंतिम संस्कार की राह में कीचड़ की बाधा
हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार को सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन असुपुरा गांव के लोगों को इस अंतिम संस्कार के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। रास्ते में घुटनों तक भरे कीचड़ और जलभराव के कारण शव यात्रा को ले जाने में परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार शव को ले जा रहे लोगों के फिसलने और गिरने का डर बना रहता है, जिससे शोक के माहौल में और अधिक परेशानी और तनाव उत्पन्न हो जाता है।
ग्रामीणों का आक्रोश और प्रशासन की चुप्पी
गांव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि उन्होंने इस समस्या के बारे में स्थानीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार सूचित किया, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकाला गया है। बारिश के कारण रास्ते पर बने गड्ढों में जलभराव हो गया है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री मानक के अनुरूप नहीं थी, इसी कारण सड़क ने इतनी जल्दी दम तोड़ दिया।
समाधान की दरकार
असुपुरा गांव के निवासी अब जिलाधिकारी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से श्मशान घाट के मार्ग की मरम्मत कराई जाए और जल निकासी के लिए उचित प्रबंध किए जाएं। एक ओर जहां सरकार ‘स्मार्ट विलेज’ की बात कर रही है, वहीं असुपुरा गांव की यह दयनीय स्थिति दर्शाती है कि विकास की किरणें अभी भी कुछ क्षेत्रों तक पहुँचने में नाकाम रही हैं। फिलहाल, यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन के रुख का इंतज़ार कर रहे हैं।






