जालौन: नगर पालिका के ‘स्वच्छता और विकास’ के दावों की खुली पोल, आराजीलाइन मोहल्ले में जलभराव से जीना दूभर

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जालौन के कोंच स्थित आराजीलाइन मोहल्ले की सड़क पर भरा हुआ घुटनों तक गंदा पानी और कीचड़, जिससे होकर स्कूली बच्चे गुजरने को मजबूर हैं।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कोंच (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कोंच नगर पालिका क्षेत्र में प्रशासन द्वारा किए जा रहे विकास और स्वच्छता के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण नगर के आराजीलाइन मोहल्ला (वार्ड नंबर 25) में देखने को मिल रहा है, जहाँ हल्की बारिश के बाद ही हालात बद से बदतर हो गए हैं। सड़कों पर बहता नालियों का गंदा पानी और हर तरफ पसरा कीचड़ नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

नरकीय जीवन जीने को मजबूर स्थानीय निवासी

​आराजीलाइन मोहल्ले की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ के निवासियों को अपने घरों से बाहर निकलना भी दुश्वार हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कई वर्षों से वे नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। जलभराव के कारण सड़कों पर कीचड़ का साम्राज्य है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।

​सबसे दयनीय स्थिति तब होती है जब स्कूली बच्चों को इसी कीचड़ और गंदे पानी से होकर अपनी पढ़ाई के लिए निकलना पड़ता है। अभिभावकों में हमेशा इस बात का डर बना रहता है कि कहीं उनका बच्चा इस गंदगी के चलते किसी बीमारी का शिकार न हो जाए या कीचड़ में फिसल कर चोटिल न हो जाए।

अनसुनी शिकायतों का सिलसिला

​मोहल्ला वासियों ने अपनी इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय नगर पालिका प्रशासन से गुहार लगाई है, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासन के सिवाय कुछ हासिल नहीं हुआ। शिकायतों के बावजूद नगर पालिका का ध्यान इस ओर नहीं गया, जिससे आक्रोशित स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन केवल बड़े-बड़े दावों में ही विकास करता है, धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

क्या बोले सभासद प्रतिनिधि?

​इस गंभीर मामले पर वार्ड नंबर 25 के सभासद प्रतिनिधि रिजवान कुरैशी ने नगर पालिका पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। रिजवान कुरैशी ने कहा, “हमने इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा और अधिकारियों को लिखित रूप से सूचित किया, लेकिन हर बार हमारी आवाज़ को अनसुना कर दिया गया। पालिका प्रशासन की उदासीनता के कारण आज पूरा मोहल्ला नारकीय स्थिति में तब्दील हो चुका है।”

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

​आराजीलाइन की इस बदहाल तस्वीर ने नगर पालिका के ‘स्वच्छता और विकास’ के उन दावों की कलई खोल दी है, जो आए दिन प्रशासन द्वारा किए जाते हैं। अब देखना यह है कि क्या इस खबर के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन नींद से जागता है और मोहल्ले की सड़कों के कायाकल्प के लिए कोई ठोस कदम उठाता है, या फिर आराजीलाइन के निवासियों को अभी और लंबा इंतजार करना पड़ेगा?

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