जालौन चौराहे से कलेक्ट्रेट तक युवाओं और ग्रामीणों ने निकाला विशाल जुलूस, थप्पड़ कांड के बाद हुए तबादले पर जताया भारी रोष

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आईएएस रिंकू सिंह राही के समर्थन में जालौन में उमड़ा जनसैलाब, दोबारा एसडीएम बनाने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर विशाल प्रदर्शन

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन (उत्तर प्रदेश)।

जालौन जिले में शनिवार को उस समय प्रशासनिक गलियारों से लेकर सड़कों तक हलचल तेज हो गई, जब चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के समर्थन में सैकड़ों की संख्या में युवा, छात्र और ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। हाल ही में हुए ‘थप्पड़ कांड’ विवाद के बाद आईएएस रिंकू सिंह राही के अचानक किए गए तबादले से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। इस स्थानांतरण के विरोध में और उन्हें दोबारा जालौन का उपजिलाधिकारी (एसडीएम) नियुक्त करने की मांग को लेकर शनिवार को एक विशाल जुलूस निकाला गया। उरई कोतवाली क्षेत्र के व्यस्त जालौन चौराहे से शुरू हुआ यह जन-आंदोलन कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर एक बड़े प्रदर्शन में तब्दील हो गया, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी माँगें बुलंद कीं।

सड़कों पर गूँजे ईमानदारी के पक्ष में नारे, हाथों में दिखे पोस्टर

​शनिवार सुबह से ही उरई के जालौन चौराहे पर युवाओं और ग्रामीणों का जुटना शुरू हो गया था। देखते ही देखते यह जमावड़ा एक विशाल जुलूस की शक्ल अख्तियार कर गया। प्रदर्शन में शामिल छात्र और युवा अपने हाथों में रिंकू सिंह राही के समर्थन में लिखे नारे, पोस्टर और बैनर थामे हुए थे। जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक तानाशाही और ईमानदार अधिकारियों के उत्पीड़न के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कलेक्ट्रेट मार्ग पर मार्च करते हुए युवाओं का हुजूम जैसे ही जिलाधिकारी कार्यालय के पास पहुँचा, सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। आंदोलनकारियों ने बेहद अनुशासित लेकिन आक्रामक अंदाज में प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी और साफ किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका विरोध विभिन्न स्तरों पर जारी रहेगा।

‘ईमानदारी की सजा ट्रांसफर नहीं’ — स्थानीय जनता का फूटा गुस्सा

​प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे युवाओं और ग्रामीण प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना था कि आईएएस रिंकू सिंह राही ने अपने संक्षिप्त कार्यकाल के दौरान जालौन में निष्पक्षता, पारदर्शिता और अटूट ईमानदारी की एक नई मिसाल पेश की थी। उन्होंने आम जनता और शोषित वर्ग की समस्याओं को न केवल सुना, बल्कि प्राथमिकता के आधार पर उनका तत्काल निस्तारण भी किया।

​प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हालिया थप्पड़ कांड विवाद में रिंकू सिंह राही को राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का शिकार बनाया गया है। विवाद के तुरंत बाद उनका तबादला कर देना यह साबित करता है कि व्यवस्था में ईमानदार अधिकारियों के लिए काम करना कितना मुश्किल होता जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने तीखे शब्दों में कहा, “रिंकू सिंह राही जैसी स्वच्छ छवि के अधिकारी का अचानक ट्रांसफर किया जाना ईमानदारी के गाल पर तमाचा है और यह कदम पूरी तरह से प्रशासनिक मनोबल को गिराने वाला है।”

जनता की जुबानी: “हमें राही सर जैसा अधिकारी ही चाहिए”

​जुलूस में शामिल ग्रामीण महिला शिवांगी ने अपनी बात रखते हुए कहा, “रिंकू सिंह राही सर ने हमेशा गरीबों और मजलूमों की बात सुनी। जब भी कोई फरियादी उनके दफ्तर जाता था, उसे न्याय की उम्मीद होती थी। थप्पड़ कांड में सच्चाई का साथ देने के बजाय उनका तबादला कर दिया गया, जो बेहद अन्यायपूर्ण है। हम सरकार से मांग करते हैं कि उन्हें तुरंत वापस जालौन का एसडीएम बनाया जाए।”

​वहीं प्रदर्शन का हिस्सा रहे स्थानीय युवा अमित ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, “एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करती है, और दूसरी तरफ जब कोई अधिकारी नियमों के तहत काम करता है और भू-माफियाओं व भ्रष्टाचारियों की आंख में खटकता है, तो उसका तबादला कर दिया जाता है। रिंकू राही सर का ट्रांसफर युवाओं और छात्रों की उम्मीदों को तोड़ने जैसा है। कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देकर हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि जालौन की जनता अपने इस ईमानदार अधिकारी के साथ मजबूती से खड़ी है।”

प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, उग्र आंदोलन की चेतावनी

​कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक चले इस प्रदर्शन के बाद आंदोलनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मुख्य रूप से आईएएस रिंकू सिंह राही के स्थानांतरण आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने और उन्हें पुनः जालौन जिले में एसडीएम के पद पर बहाल करने की मांग की गई है। युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए शासन स्तर पर इस मांग पर विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में और अधिक उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल, इस बड़े प्रदर्शन ने जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बेचैनी बढ़ा दी है।

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