जालौन में प्रशासनिक कार्रवाई पर भारी सियासी घमासान: भाजपा विधायक गौरीशंकर वर्मा का वीडियो वायरल, अधिकारियों को दी खुली चेतावनी

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जालौन में एक सार्वजनिक मंच पर भाषण देते भाजपा विधायक गौरीशंकर वर्मा, पृष्ठभूमि में प्रशासनिक कार्रवाई और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का प्रतीकात्मक चित्रण।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में अवैध गतिविधियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे कड़े अभियान के बीच अब एक नया और बड़ा राजनीतिक मोड़ आ गया है। जिले में अवैध खनन, अतिक्रमण और नियमों के खिलाफ चल रहे व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हो रही ताबड़तोड़ कार्रवाई से जहाँ एक तरफ हड़कंप मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ अब इस मामले में खुलकर राजनीतिक हस्तक्षेप भी सामने आने लगा है। सदर सीट से भाजपा विधायक गौरीशंकर वर्मा द्वारा एक सार्वजनिक कार्यक्रम में नगर पालिका और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिले का सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुँच गया है।

विधायक की खुली चेतावनी: ‘हमारे क्षेत्र में ऐसे अधिकारी नहीं रहेंगे’

​दरअसल, सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे एक वीडियो ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस वीडियो में भाजपा विधायक गौरीशंकर वर्मा एक कार्यक्रम के दौरान मंच से बेहद तल्ख तेवरों में पालिका और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों पर अपनी भड़ास निकालते नजर आ रहे हैं। विधायक ने साफ तौर पर कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में जनता को परेशान करने वाले या मनमानी करने वाले अधिकारियों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे अधिकारियों को जल्द ही यहाँ से विदा होना पड़ेगा। हालांकि, इस पूरे बयान के दौरान विधायक ने सीधे तौर पर किसी भी अधिकारी या उपजिलाधिकारी (SDM) का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा किस तरफ था, यह जिले की जनता और सियासी पंडितों के लिए समझना कतई मुश्किल नहीं है।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही की सख्त कार्रवाई से मचा है हड़कंप

​इस पूरे विवाद के केंद्र में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और तेजतर्रार प्रशासनिक अधिकारी रिंकू सिंह राही की कार्यशैली को माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने जालौन में अवैध खनन, खनिजों के अवैध परिवहन, सार्वजनिक जमीनों पर किए गए अतिक्रमण और नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और व्यापक अभियान छेड़ रखा है।

​हाल के दिनों में प्रशासन ने जिले के कई नामचीन होटलों, अवैध रूप से चल रहे मेडिकल स्टोरों और अन्य बड़े व्यावसायिक केंद्रों पर छापेमारी कर सीलिंग और जुर्माने की कड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन की इस निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई से कई बड़े और रसूखदार कारोबारियों सहित स्थानीय सफेदपोशों में भी भारी खलबली मची हुई है।

तबादले की मांग और उठते कई गंभीर सवाल

​विधायक का वीडियो सामने आने और पर्दे के पीछे से अधिकारी के तबादले की मांग उठने के बाद अब आम जनता के बीच कई तरह के सवाल तैरने लगे हैं। जिले की प्रबुद्ध जनता और जागरूक नागरिकों के बीच यह चर्चा का मुख्य विषय बन गया है कि आखिर जो अधिकारी पूरी ईमानदारी से अवैध गतिविधियों और माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, उसे हटाने की जमीन क्यों तैयार की जा रही है?

चर्चा का विषय: क्या रसूखदार कारोबारियों और अवैध धंधों में लिप्त लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है? या फिर इस कार्रवाई की आड़ में आम जनता को भी परेशान किया जा रहा है, जिसे आधार बनाकर जनप्रतिनिधि सामने आए हैं? इन सवालों ने फिलहाल जालौन की राजनीति को पूरी तरह से गर्मा दिया है।

प्रशासनिक बनाम राजनीतिक वर्चस्व की जंग

​जालौन का यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश में अक्सर देखने को मिलने वाली ‘प्रशासन बनाम राजनीति’ के वर्चस्व की जंग का एक ताजा उदाहरण बन गया है। एक तरफ जहां योगी सरकार सूबे में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत भ्रष्टाचार और माफियाओं पर नकेल कसने का दावा करती है, वहीं जमीनी स्तर पर सत्ताधारी दल के ही विधायक द्वारा कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल देना सरकार की इस नीति पर भी सवालिया निशान खड़े करता है। फिलहाल, इस वायरल वीडियो के बाद प्रशासनिक खेमे में भी भीतर ही भीतर सुगबुगाहट तेज है और हर किसी की नजरें अब लखनऊ के रुख पर टिकी हैं कि क्या इस विवाद के बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का तबादला होता है या प्रशासन अपनी कार्रवाई को इसी तरह जारी रखता है।

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