जालौन: कोर्ट से NBW जारी होने के बाद भी आरोपी फरार, पीड़िता ने लगाया पुलिस पर संरक्षण का आरोप; एसपी से सुरक्षा की गुहारजालौन (उत्तर प्रदेश)

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
कदौरा (जालौन) : उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और अपराधियों पर नकेल कसने के तमाम दावों के बीच जालौन जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जिले के कदौरा थाना क्षेत्र का एक चर्चित मामला एक बार फिर से गर्मा गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) उरई की अदालत द्वारा गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए जाने के बाद भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है। इससे परेशान होकर पीड़िता ने अब पुलिस अधीक्षक (एसपी) का दरवाजा खटखटाया है और स्थानीय पुलिस पर आरोपी को संरक्षण देने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कदौरा थाना क्षेत्र के ग्राम इस्लामाबाद की रहने वाली पीड़िता अर्चना (पुत्री स्वर्गीय दयाराम) ने पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह को एक शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। अर्चना का आरोप है कि आरोपी रहीस अहमद के खिलाफ पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) तो दाखिल कर दी है, और मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय सीजेएम कोर्ट उरई ने आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) भी जारी कर दिया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अदालती आदेश के हफ्तों बाद भी कदौरा थाना पुलिस आरोपी को छू तक नहीं सकी है।
खुलेआम घूम रहा आरोपी, पीड़िता के परिवार को मिल रही धमकियां
पीड़िता अर्चना ने एसपी को दिए अपने शिकायती पत्र में बेहद चौंकाने वाले और डराने वाले खुलासे किए हैं। पीड़िता का कहना है कि:
”आरोपी रहीस अहमद क्षेत्र में खुलेआम घूम रहा है। वह न सिर्फ कानून की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि मुझे और मेरे पूरे परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां दे रहा है। वह कहता है कि पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।”
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी द्वारा उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भिजवाने का मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। इस दबंगई के कारण पीड़िता का पूरा परिवार खौफ के साए में जीने को मजबूर है और घर में असुरक्षा का माहौल व्याप्त हो गया है।
दो मामलों में चार्जशीट दाखिल, फिर भी पुलिस मेहरबान क्यों?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह उठ रहा है कि आखिर जालौन पुलिस इतनी बेबस क्यों नजर आ रही है? सूत्रों के मुताबिक, आरोपी रहीस अहमद के खिलाफ एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग मामलों में पुलिस पहले ही जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। जब किसी आरोपी के खिलाफ दो-दो मामलों में चार्जशीट लग चुकी हो और देश की अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया हो, तो पुलिस की सुस्ती कई तरह के संदेहों को जन्म देती है।
पीड़िता ने सीधे तौर पर स्थानीय कदौरा पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा है कि आरोपी को राजनीतिक या स्थानीय स्तर पर पुलिस का गुप्त संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते उसके खिलाफ कोई प्रभावी या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।
स्थानीय स्तर पर गहराया रोष, अब एसपी की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस घटना को लेकर इस्लामाबाद और कदौरा के स्थानीय निवासियों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि अगर कोर्ट के आदेशों का पालन कराने में ही पुलिस इस तरह ढीला रवैया अपनाएगी, तो आम जनता का कानून से विश्वास उठ जाएगा।
पीड़िता अर्चना ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह से मांग की है कि आरोपी रहीस अहमद को तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए और उसके पीड़ित परिवार को उचित सुरक्षा मुहैया कराई जाए। अब देखना बेहद अहम होगा कि इस गंभीर शिकायत के बाद जालौन पुलिस हरकत में आती है या फिर पीड़िता को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा। फिलहाल, सभी की निगाहें एसपी जालौन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
बाइट (Statement):
“अदालत से वारंट जारी होने के बावजूद पुलिस रहीस अहमद को गिरफ्तार नहीं कर रही है। वह खुलेआम घूमकर हमें जान से मारने की धमकी दे रहा है। हमें पुलिस से कोई मदद नहीं मिल रही, ऐसा लगता है जैसे पुलिस ही उसे बचा रही है। मैंने एसपी साहब से न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है।”






