जालौन: मंदिर के पास शराब के ठेके पर भड़कीं महिलाएं, जालौन-उरई मुख्य मार्ग पर लगाया घंटों जाम

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई/(जालौन)। जनपद के बोहदपुरा गांव में सोमवार की सुबह उस वक्त भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब दर्जनों ग्रामीण महिलाएं शराब के ठेके के विरोध में सड़कों पर उतर आईं। गांव के पवित्र मंदिर के समीप संचालित हो रहे शराब के ठेके से नाराज महिलाओं ने जालौन-उरई मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। लगभग एक घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप रहा। पुलिस के कड़े आश्वासन और उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही जाम खोला जा सका।
आस्था और सुरक्षा पर भारी पड़ता ‘नशे का अड्डा’
बोहदपुरा गांव के ग्रामीणों का आक्रोश लंबे समय से पनप रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के मुख्य मंदिर के ठीक पास शराब का ठेका खोल दिया गया है, जो न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहा है, बल्कि गांव की सुरक्षा और शांति के लिए भी खतरा बन गया है। महिलाओं ने बताया कि मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए जाने वाली महिलाओं और स्कूल जाने वाली बालिकाओं को शराबियों की अभद्र टिप्पणियों और हंगामे का सामना करना पड़ता है।
सुबह 10 बजे रणचंडी बनीं महिलाएं
सोमवार सुबह करीब 10 बजे सब्र का बांध टूट गया और गांव की दर्जनों महिलाएं एकजुट होकर मुख्य मार्ग पर आ बैठीं। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने जिला प्रशासन और आबकारी विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही महिलाओं ने कहा, “हमने इस ठेके को हटाने के लिए कई बार जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हमारी सुनवाई नहीं हुई। ठेका खुलने के बाद से गांव का माहौल पूरी तरह प्रदूषित हो गया है। दिनभर शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है और रात होते-होते घरों में घरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं।”
जाम से थमी रफ्तार, पुलिस महकमे में मची खलबली
मुख्य मार्ग पर जाम की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ उरई राजीव शर्मा और उरई कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक हरिशंकर भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी महिलाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं ठेके को तत्काल बंद करने या उसे गांव से दूर स्थानांतरित करने की मांग पर अड़ी रहीं। महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और आत्मदाह जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगी।
प्रशासनिक आश्वासन और यातायात की बहाली
सीओ राजीव शर्मा ने महिलाओं की समस्याओं को सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी जायज मांगों और भावनाओं को जिला प्रशासन व आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने नियमानुसार ठेके के स्थान परिवर्तन के लिए आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। पुलिस के लिखित और मौखिक आश्वासन के बाद महिलाएं सड़क से हटने को तैयार हुईं। इसके बाद पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर जाम खुलवाया और यातायात को सामान्य कराया।
सामाजिक ताने-बाने पर प्रहार
यह घटना केवल एक ठेके के विरोध की नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शराब के कारण बिगड़ते सामाजिक माहौल की ओर इशारा करती है। बोहदपुरा की महिलाओं का यह साहसी कदम प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि यदि सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों के पास शराब की दुकानों का आवंटन इसी तरह जारी रहा, तो भविष्य में जन-आक्रोश और भी तीव्र हो सकता है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।







