जालौन में बड़ा हादसा: NH-27 के अंडरपास की स्लैब भरभराकर गिरी, बाल-बाल बचे राहगीर

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जालौन के कालपी में NH-27 पर बने अंडरपास की क्षतिग्रस्त स्लैब और गिरा हुआ मलबा, घटनास्थल पर जमा स्थानीय लोग और सुरक्षा के लिए घेरी गई जगह।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कालपी (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। कालपी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत नेशनल हाईवे-27 (NH-27) पर बने एक महत्वपूर्ण अंडरपास की स्लैब अचानक भरभराकर गिर गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​मुन्नाफुल पावर चौराहे पर मची अफरा-तफरी

​घटना कालपी स्थित मुन्नाफुल पावर चौराहे की है। रविवार को हो रही भारी बारिश के बीच अचानक अंडरपास की छत (स्लैब) का हिस्सा कमजोर होकर नीचे गिर गया। जिस समय यह मलबा नीचे गिरा, उस समय वहां से गुजर रहे राहगीर बाल-बाल बच गए। यदि उस दौरान कोई भारी वाहन या पैदल यात्री स्लैब के ठीक नीचे होता, तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था। मलबे के गिरने से जोरदार आवाज हुई, जिससे आसपास के दुकानदार और राहगीर सहम गए और घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।

​अंडरपास के बीच बना बड़ा सुराग, आवागमन पर खतरा

​स्लैब का बड़ा हिस्सा गिरने के कारण अंडरपास की संरचना में बीचों-बीच एक बड़ा सुराग (गड्ढा) बन गया है। इस क्षति ने न केवल अंडरपास की मजबूती को संदिग्ध बना दिया है, बल्कि वहां से गुजरने वाले हजारों लोगों की जान पर भी संकट पैदा कर दिया है। फिलहाल प्रशासन ने एहतियातन उस हिस्से को चिह्नित करने का प्रयास किया है, लेकिन जिस तरह से कंक्रीट और सरिये लटक रहे हैं, वह किसी भी समय आगे और बड़े हादसे को निमंत्रण दे रहे हैं।

​स्थानीय लोगों में आक्रोश: निर्माण में लीपापोती का आरोप

​घटना के बाद आक्रोशित स्थानीय लोगों ने नेशनल हाईवे के निर्माण कार्य पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह अंडरपास अभी बहुत पुराना नहीं है, बावजूद इसके इसकी हालत जर्जर हो गई है। लोगों का आरोप है कि निर्माण के दौरान मानक सामग्री का उपयोग नहीं किया गया और पूरी प्रक्रिया में केवल लीपापोती की गई। स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने बताया, “हमने पहले भी अधिकारियों से शिकायत की थी कि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई है, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। आज जो हुआ वह उसी भ्रष्टाचार का परिणाम है।”

​प्रशासन की भूमिका पर सवाल

​सवाल यह है कि इतने व्यस्त हाईवे पर लाखों की संख्या में वाहन गुजरते हैं, फिर भी निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी क्यों नहीं की गई? हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। हाईवे ऑथोरिटी के अधिकारियों को इस संबंध में तत्काल मरम्मत और जांच के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, सवाल अब भी वही है कि क्या विभाग इस जर्जर हो चुके स्ट्रक्चर की पूरी तरह से जांच कराएगा, ताकि भविष्य में कोई बड़ी जनहानि न हो?

​फिलहाल, राहगीरों को उस रास्ते से गुजरते समय काफी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है और क्षतिग्रस्त हिस्से को बैरिकेडिंग कर सुरक्षित करने की कोशिश की जा रही है।

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