जालौन में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम तेज: जिलाधिकारी ने दिए अंत्योदय परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने के कड़े निर्देश

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उरई कलेक्ट्रेट सभागार में जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में उपस्थित मुख्य विकास अधिकारी और अन्य जनपद स्तरीय अधिकारी।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद में ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उरई कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के अंतर्गत जिला क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण समिति की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में जनपद के भीतर स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के विस्तार, बैंक लिंकेज, आजीविका संवर्धन तथा केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी “लखपति दीदी योजना” की प्रगति की बिंदुवार व विस्तृत समीक्षा की गई।

​ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं स्वयं सहायता समूह: जिलाधिकारी

​बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और सर्वांगीण सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। वर्तमान परिदृश्य में स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती और दिशा प्रदान कर रहे हैं।

​जिलाधिकारी ने लोक-कल्याणकारी नीतियों पर जोर देते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े पात्र एवं विशेष रूप से अंत्योदय राशन कार्ड धारक परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर स्वयं सहायता समूहों के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और सतत आय सृजन की गतिविधियों से जोड़कर उनके परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।

​जालौन जनपद में आजीविका मिशन की वर्तमान स्थिति

​समीक्षा के दौरान अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, जालौन जनपद में आजीविका मिशन के तहत अब तक कुल 9,413 स्वयं सहायता समूहों का गठन सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इन समूहों के माध्यम से वर्तमान में जनपद के 1,37,701 ग्रामीण परिवार सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इसके अतिरिक्त, जमीनी स्तर पर ग्रामीण आजीविका को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 986 ग्राम संगठन और 36 संकुल स्तरीय संघ (CLF) पूरी सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं।

​जिलाधिकारी ने इस तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से निर्देश दिए कि सभी गठित समूहों को रिवॉल्विंग फंड (RF), सामुदायिक निवेश निधि (CIF) एवं बैंक लिंकेज जैसी वित्तीय सुविधाओं से शत-प्रतिशत लाभान्वित किया जाए, ताकि फंड के अभाव में कोई भी उद्यम न रुके।

​धीमी प्रगति पर भड़के डीएम, चार विकास खंडों के अधिकारियों को चेतावनी

​समीक्षा बैठक के दौरान जब विभिन्न विकास खंडों में परिवारों के संतृप्तिकरण (समानुपातिक जुड़ाव) की समीक्षा की गई, तो कुछ क्षेत्रों में प्रगति बेहद असंतोषजनक पाई गई। इस लचर कार्यप्रणाली और कम प्रगति पर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।

​उन्होंने विशेष रूप से विकास खंड माधौगढ़, नदीगांव, रामपुरा और जालौन के संबंधित खंड विकास अधिकारियों व आजीविका मिशन के प्रभारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए एक सप्ताह के भीतर कार्यप्रणाली में सुधार लाने और लक्ष्य प्राप्त करने के कड़े निर्देश दिए। इसके साथ ही, उन्होंने अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) तथा बैंक अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे आपसी समन्वय स्थापित कर स्वयं सहायता समूहों को सुगमता से ऋण (Loan) उपलब्ध कराने के लिए जनपद में एक विशेष अभियान चलाएं।

​41 हजार से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

​सरकार की फ्लैगशिप योजना “लखपति दीदी योजना” की प्रगति को लेकर भी बैठक में व्यापक मंथन हुआ। प्रशासन ने आगामी वर्षों में जालौन जनपद की 41,526 महिलाओं को लखपति दीदी (वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक करने) के रूप में विकसित करने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।

​इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में अब तक जनपद में 472 लखपति सीआरपी (Community Resource Person) का चयन किया जा चुका है, जिनमें से 80 सीआरपी को आवश्यक तकनीकी व व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा चुका है ताकि वे धरातल पर महिलाओं का मार्गदर्शन कर सकें।

​विविध आजीविका गतिविधियों और प्रेरणा कैंटीन के विस्तार पर जोर

​महिलाओं की आय में गुणात्मक वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी ने केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित न रहकर बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिला समूहों को कृषि, उन्नत डेयरी फार्मिंग, आधुनिक सिलाई-कढ़ाई, फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण), पेपर उत्पाद निर्माण, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) दुकानों के संचालन, मूंगफली उत्पादन तथा अन्य गैर-कृषि आधारित व्यावसायिक गतिविधियों से बड़े पैमाने पर जोड़ा जाए।

रोजगार के वर्तमान आंकड़े: वर्तमान में जनपद की 6,143 महिलाएं गैर-कृषि आधारित गतिविधियों से सीधे तौर पर जुड़कर अपनी आजीविका चला रही हैं। इसके अलावा, स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP), ड्राई फूड वितरण, प्रेरणा कैंटीन और राशन दुकानों के माध्यम से भी महिलाओं को सतत रोजगार मिल रहा है।

​प्रशासनिक स्तर पर समूहों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद के सभी विकास खंड कार्यालयों, तहसीलों, जिला अस्पताल तथा राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में अनिवार्य रूप से स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित “प्रेरणा कैंटीन” की स्थापना की जाए।

​लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस की नीति

​बैठक के समापन पर जिलाधिकारी ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रत्येक पात्र और निर्धन परिवार तक सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना है। इस जनकल्याणकारी कार्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता, उदासीनता या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

​इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) केके सिंह, परियोजना निदेशक (PD) अखिलेश तिवारी, जिला विकास अधिकारी (DDO) प्रशांत पाण्डेय, उपायुक्त स्वतः रोजगार/मनरेगा रामेन्द्र सिंह सहित जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति के तमाम सदस्य, बैंकर्स और संबंधित विभागों के आला अधिकारी उपस्थित रहे।

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