​उरई: नियम तोड़ने वाले कोल्ड स्टोरेज संचालकों पर डीएम का शिकंजा, नवीनीकरण न होने पर लेनदेन पर लगाई रोक

0
जालौन जिले के कोल्ड स्टोरेज के लिए प्रशासन द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देश

उरई (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में आलू भंडारण सीजन के शुरू होने से पहले प्रशासन ने शीतगृहों (कोल्ड स्टोरेज) की फिटनेस और उनके नवीनीकरण को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि जिन शीतगृहों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना लाइसेंस नवीनीकरण नहीं कराया है, उन्हें तत्काल नोटिस जारी किया जाए।

​डीएम ने कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि जब तक नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक ऐसे शीतगृहों में किसी भी प्रकार का आर्थिक लेनदेन या अंतरण (ट्रांजैक्शन) नहीं किया जा सकेगा।

तीन दिन का अल्टीमेटम: जमा करने होंगे ये जरूरी दस्तावेज

​जिलाधिकारी ने शासनादेश का हवाला देते हुए शीतगृह स्वामियों को मात्र तीन दिन का समय दिया है। इस अवधि के भीतर सभी संचालकों को कार्यालय में आवश्यक अभिलेख जमा कराने होंगे। आवेदन पत्र पूरी तरह स्पष्ट और नियमावली के अनुसार भरा होना चाहिए। जिलाधिकारी ने आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों की अनिवार्यता पर जोर दिया:

  1. इंजीनियर द्वारा फिटनेस सर्टिफिकेट: भवन की मजबूती के लिए पंजीकृत सिविल इंजीनियर और मशीनरी की कार्यक्षमता के लिए मैकेनिकल/रेफ्रिजरेशन इंजीनियर का प्रमाण-पत्र।
  2. बीमा पॉलिसी: पिछले वर्ष की बीमा पॉलिसी के कवर नोट की सत्यापित प्रति।
  3. बिजली और जनरेटर व्यवस्था: विद्युत लोड स्वीकृति के साथ-साथ बिजली कटौती की स्थिति में जनरेटर (वैकल्पिक व्यवस्था) की उपलब्धता का प्रमाण।
  4. प्रदूषण बोर्ड का एनओसी: उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी वैध प्रमाण-पत्र।
  5. शुल्क रसीद: कोषागार में जमा किए गए लाइसेंस/नवीनीकरण शुल्क की मूल रसीद।

भंडारण प्रक्रिया में पारदर्शिता के निर्देश

​किसानों के हितों की रक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि शीतगृहों में आलू भंडारण के समय किसानों को जो पावती रसीद दी जाती है, उसमें भंडारण शुल्क और भंडारण की अवधि (15 फरवरी से 30 नवंबर तक) का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। यह जानकारी शीतगृह के बाहर सूचना पट्ट पर भी चस्पा की जानी अनिवार्य है, ताकि किसानों को किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

प्रबंधन में बदलाव की देनी होगी अंडरटेकिंग

​डीएम ने स्पष्ट किया कि यदि कोई शीतगृह पार्टनरशिप या लिमिटेड कंपनी के अंतर्गत संचालित हो रहा है, तो आवेदन पत्र पर अधिकृत व्यक्ति (मैनेजिंग डायरेक्टर या पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर) के हस्ताक्षर होने चाहिए। साथ ही, यह शपथ-पत्र (अंडरटेकिंग) भी देना होगा कि आवेदन की तिथि तक प्रबंधन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यदि पिछले वर्ष भंडारण के दौरान किसी भी प्रकार की क्षति हुई थी, तो उसकी भी विस्तृत रिपोर्ट विभाग को देनी होगी।

लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

​बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित नवीनीकरण प्रकरणों में ढिलाई न बरती जाए। यदि संचालक समय पर मानक पूरे नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

​इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह, जिला उद्यान अधिकारी (DHO) परवेज खान सहित कृषि और उद्यान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, जालौन |UP SAMVAD
Source: Local Sources

Leave a Reply

You may have missed