विशेष रिपोर्ट: उरई न्यायालय के बाहर वकीलों का भारी हंगामा; TSI पर मारपीट का आरोप, पुलिस प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा

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जालौन के उरई जिला न्यायालय के बाहर बड़ी संख्या में एकत्रित आक्रोशित अधिवक्ता, जो पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं

रिपोर्ट : राहुल,जालौन। UP SAMVAD

​उरई (जालौन): जनपद जालौन के मुख्यालय उरई में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब जिला एवं सत्र न्यायालय के मुख्य द्वार पर सैकड़ों अधिवक्ता पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ सड़क पर उतर आए। मामला एक अधिवक्ता के साथ ट्रैफिक पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई अभद्रता और मारपीट से जुड़ा है। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने न केवल पुलिस प्रशासन के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की, बल्कि आरोपी पुलिसकर्मी की तत्काल बर्खास्तगी की मांग को लेकर घंटों धरना प्रदर्शन किया, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
​विवाद की जड़: अधिवक्ता के साथ कथित दुर्व्यवहार
​प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब अधिवक्ता गोविंद भदारी किसी कार्यवश जा रहे थे। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर (TSI) वीर बहादुर ने उनके साथ न केवल अभद्रता की, बल्कि कानून को ताक पर रखकर मारपीट भी की। जैसे ही यह खबर न्यायालय परिसर के भीतर पहुंची, साथी अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते सैकड़ों वकील काम छोड़कर सड़क पर आ गए और ‘पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद’ के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
​घंटों बाधित रहा यातायात, राहगीर हुए परेशान
​अधिवक्ताओं के इस अचानक प्रदर्शन के चलते न्यायालय परिसर के बाहर का मुख्य मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीचों-बीच बैठकर धरना शुरू कर दिया, जिसके कारण दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सोमवार का दिन होने के कारण न्यायालय में वादकारियों की भारी भीड़ थी, जिन्हें इस हंगामे के चलते काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आसपास के थानों की पुलिस फोर्स को भी मौके पर बुला लिया गया।
​बार एसोसिएशन का कड़ा रुख: ‘बर्खास्तगी से कम कुछ मंजूर नहीं’
​प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिला बार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष भगवत शरण मिश्रा और महासचिव पंकज खरे ने दोटूक शब्दों में कहा कि पुलिस का यह रवैया अब बर्दाश्त से बाहर है। उन्होंने कहा, “एक अधिवक्ता समाज का सजग प्रहरी होता है, यदि उसके साथ ही सरेराह इस तरह की मारपीट और गाली-गलौज की जाएगी, तो आम जनता का क्या होगा?” बार पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आरोपी टीएसआई वीर बहादुर को तत्काल सेवा से निलंबित या बर्खास्त नहीं किया गया, तो यह आंदोलन केवल उरई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे प्रदेश स्तर पर ले जाया जाएगा।
​प्रशासनिक हस्तक्षेप और आश्वासन
​मामले को बिगड़ता देख क्षेत्राधिकारी (CO) उरई, राजीव शर्मा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने काफी देर तक बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और आक्रोशित वकीलों के साथ वार्ता की। सीओ ने भरोसा दिलाया कि पुलिस किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी का समर्थन नहीं करती है। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर पुलिसकर्मी के विरुद्ध कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इस ठोस आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं ने अपना धरना समाप्त किया और सड़क से हटे, जिसके बाद पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर यातायात को सुचारू कराया।
​न्यायालय परिसर में दिनभर बनी रही चर्चा
​इस घटना के बाद से ही जिला न्यायालय में न्यायिक कार्य आंशिक रूप से प्रभावित रहा। वकीलों के बीच पुलिस के ‘अड़ियल’ रवैये को लेकर गहरा असंतोष देखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो पुलिस अधिकारियों ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हालांकि, अधिवक्ता समाज अभी भी पूरी तरह शांत नहीं है और उनकी नजरें प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदम पर टिकी हैं।

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