कोंच तहसील में लाखों की लागत से बना ‘डीलक्स शौचालय’ बना सफेद हाथी, गंदगी के अंबार के बीच अधिवक्ता ने एसडीएम से की शिकायत

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कोंच तहसील परिसर में गंदगी से भरा बदहाल डीलक्स शौचालय और शिकायत दर्ज कराते अधिवक्ता।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कोंच (जालौन): उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार जहाँ एक ओर ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत अरबों रुपये खर्च कर स्वच्छता का अलख जगा रही हैं, वहीं जालौन जिले की कोंच तहसील से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। तहसील परिसर में आम जनता और अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए ‘सांसद निधि’ से निर्मित लाखों रुपये की लागत वाला डीलक्स शौचालय आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। रख-रखाव के अभाव में यह शौचालय न केवल उपयोगहीन हो गया है, बल्कि परिसर में संक्रमण और दुर्गंध का केंद्र भी बन चुका है।

सांसद निधि के धन की अनदेखी और ‘शून्य’ उपयोगिता

​विदित हो कि कुछ वर्ष पूर्व स्थानीय सांसद की निधि से इस डीलक्स शौचालय का निर्माण इस उद्देश्य के साथ कराया गया था कि तहसील आने वाले हजारों वादकारियों, फरियादियों और अधिवक्ताओं को सुव्यवस्थित प्रसाधन की सुविधा मिल सके। निर्माण के समय इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस बताया गया था, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति यह है कि जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते इसकी उपयोगिता पूरी तरह शून्य साबित हो रही है। शौचालय के भीतर न तो नियमित सफाई होती है और न ही पानी की समुचित व्यवस्था है, जिसके कारण यह खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।

समाधान दिवस में गूँजा बदहाली का मुद्दा

​शनिवार को आयोजित ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ के अवसर पर यह मामला उस समय गरमा गया जब वरिष्ठ अधिवक्ता रामबाबू निरंजन ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) ज्योति सिंह को एक लिखित शिकायती पत्र सौंपा। अधिवक्ता ने कड़े शब्दों में प्रशासन को अवगत कराया कि जिस स्थान को तहसील की ‘शान’ और ‘सुविधा’ होना चाहिए था, वह आज उपेक्षा का शिकार है। उन्होंने कहा कि लाखों रुपये के सार्वजनिक धन को जिस तरह से बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया गया है, वह सीधे तौर पर प्रशासनिक शिथिलता को दर्शाता है।

अधिवक्ताओं और फरियादियों को हो रही भारी असुविधा

​एसडीएम को दिए शिकायती पत्र में अधिवक्ता रामबाबू निरंजन ने बताया कि तहसील में हर दिन दूर-दराज के गांवों से लोग अपने कार्यों के लिए आते हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए स्थिति और भी विकट हो जाती है। शौचालय के अंदर फैली गंदगी और असहनीय दुर्गंध के कारण लोग वहां कदम रखने से भी कतराते हैं। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि शौचालय की देखरेख के लिए किसी भी स्थायी सफाईकर्मी की नियुक्ति नहीं की गई है, जिसके चलते सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने इसे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करार दिया।

प्रशासनिक आश्वासन और कार्रवाई की मांग

​अधिवक्ता ने प्रशासन से मांग की है कि जनहित को देखते हुए तत्काल प्रभाव से शौचालय की मरम्मत कराई जाए और वहां नियमित सफाई के लिए एक स्थायी कर्मचारी की तैनाती सुनिश्चित की जाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ज्योति सिंह ने शिकायत को संज्ञान में लिया है और संबंधित विभाग को इस समस्या के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की यह फाइल कागजों से निकलकर धरातल पर कब तक पहुंचती है और कब तहसील आने वाले लोगों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिलती है।

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