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बबीना आश्रम पद्धति स्कूल में 4 करोड़ की परियोजना में बड़ी लापरवाही: डीएम के निरीक्षण में खुली पोल, 10% जुर्माने के साथ TAC जांच के आदेश

राजकीय आश्रम पद्धति इंटर कॉलेज बबीना में निर्माणाधीन ट्रांजिट हॉस्टल का निरीक्षण करते जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और साथ में मौजूद अन्य प्रशासनिक अधिकारी

उरई (जालौन): जनपद में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में आज जिलाधिकारी ने राजकीय आश्रम पद्धति इंटर कॉलेज, बबीना के परिसर में बन रहे शिक्षकों के ट्रांजिट हॉस्टल का औचक निरीक्षण किया। लगभग 4 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट में गंभीर तकनीकी खामियां और मानकों की अनदेखी पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कार्यदायी संस्था ‘यूपी सिडको’ के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश देते हुए पूरी परियोजना की तकनीकी जांच (TAC) कराने का फैसला लिया है।

​भवन की छत काटने पर जताई कड़ी आपत्ति

​निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी उस समय हतप्रभ रह गए, जब उन्होंने देखा कि नवनिर्मित भवन की छत को विद्युत लाइट फिटिंग के लिए जगह-जगह से काटा गया है। इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार, लेंटर डालने के बाद छत को काटना उसकी संरचनात्मक मजबूती (Structural Integrity) के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। डीएम ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रकार की लापरवाही से भविष्य में भवन की उम्र कम हो सकती है और किसी भी अनहोनी की संभावना बनी रहती है। यह सीधे तौर पर निर्माण मानकों का उल्लंघन है।

​फिनिशिंग में कमी और गुणवत्ता पर सवाल

​करोड़ों की लागत वाली इस परियोजना में न केवल तकनीकी खामियां मिलीं, बल्कि कार्य की फिनिशिंग भी अत्यंत दोयम दर्जे की पाई गई। दीवारों की चिनाई से लेकर प्लास्टर और अन्य फिनिशिंग कार्यों में सफाई का अभाव दिखा, जिससे कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। जिलाधिकारी ने मौके पर ही मौजूद अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों को फटकार लगाते हुए पूछा कि ऐसी गुणवत्ता के साथ परियोजना को आगे कैसे बढ़ने दिया गया।

​टीएसी जांच और 10 प्रतिशत जुर्माने का चाबुक

​मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने तत्काल प्रभाव से निर्माणाधीन परियोजना की टीएसी (टेक्निकल ऑडिट कमेटी) से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आ जाती, गुणवत्ता पर संशय बना रहेगा। इसके साथ ही, कार्य में बरती गई घोर लापरवाही और मानकों की अनदेखी के लिए जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था पर 10 प्रतिशत एलडी क्लॉज (लिक्विडेटेड डैमेज) लगाने के आदेश दिए हैं, जो संस्था के लिए एक बड़ा आर्थिक दंड है।

​प्रशासनिक रुख: लापरवाही बर्दाश्त नहीं

​निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी ने मीडिया और संबंधित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि, “शासकीय धन का दुरुपयोग और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। सभी विभाग और कार्यदायी संस्थाएं यह सुनिश्चित करें कि कार्य पूर्ण सुरक्षा और मानकों के अनुरूप हों।” उन्होंने सभी तकनीकी खामियों को युद्धस्तर पर दुरुस्त करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण करने की चेतावनी दी।

​इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी कालपी मनोज सिंह, खंड विकास अधिकारी संदीप मिश्रा, कॉलेज के शिक्षक गण तथा जनपद के अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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