डीएम राजेश कुमार पाण्डेय का सख्त रुख: निर्माणाधीन सीएमओ कार्यालय में मिली खामियां, छज्जा तोड़ने और मानक अनुसार पुनर्निर्माण के निर्देश

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जालौन जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय निर्माणाधीन सीएमओ कार्यालय भवन का निरीक्षण करते हुए और अधिकारियों को निर्देश देते हुए

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन। जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में मुख्यालय पर निर्माणाधीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) एवं अधीनस्थ कार्यालय भवन का जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने औचक स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी का कड़ा रुख देखने को मिला। उन्होंने निर्माण कार्यों में मिली तकनीकी खामियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी धन का दुरुपयोग और गुणवत्ता से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

30 जून तक कार्य पूर्ण करने की डेडलाइन

​लगभग 391.77 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रहे इस प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था ‘सी एंड डीएस, उत्तर प्रदेश जल निगम, झांसी’ को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने निर्देशित किया कि समस्त निर्माण कार्य आगामी 30 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएं। डीएम ने कहा कि प्रोजेक्ट में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं में भी विलंब होता है। उन्होंने कार्य की गति को बढ़ाने के लिए श्रमिकों और संसाधनों की संख्या में वृद्धि करने के निर्देश दिए।

मानक के विपरीत निर्माण पर गिरी गाज

​निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी की पारखी नजरों से तकनीकी त्रुटियां नहीं बच सकीं। मुख्य गेट के ऊपर नवनिर्मित छज्जे का बारीकी से अवलोकन करने पर पाया गया कि वह स्वीकृत ड्राइंग और तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं है। इस पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए डीएम ने आदेश दिया कि दोषपूर्ण छज्जे को तत्काल तोड़ दिया जाए और उसे स्वीकृत मानचित्र के अनुसार पुनः निर्मित कराया जाए। उन्होंने कहा कि फिनिशिंग कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन सामग्री का प्रयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गैरेज के स्थान में बदलाव और बेहतर नियोजन

​भवन के ले-आउट का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने पाया कि भवन के बाईं ओर प्रस्तावित गैरेज का स्थान अनुपयुक्त है, जिससे भविष्य में आवागमन में बाधा आ सकती है। दूरदर्शिता का परिचय देते हुए उन्होंने गैरेज को वहां से हटाकर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। उन्होंने जोर दिया कि भवन का नियोजन ऐसा होना चाहिए जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक और सुलभ हो।

सशक्त मॉनिटरिंग और प्रशासनिक उपस्थिति

​जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडोओ) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि वे नियमित अंतराल पर साइट का दौरा करें। उन्होंने कहा:

​”यह केवल एक भवन नहीं है, बल्कि जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र है। इसकी गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की सीधी जिम्मेदारी है।”

​इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी (CDO) केके सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. बीरेंद्र सिंह, डीसी मनरेगा रामेंद्र सिंह सहित जल निगम के अभियंता और जिला प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी के इस कड़े रुख से कार्यदायी संस्थाओं और लापरवाह अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति है।

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