जवेलौन:किसानों की 9 सूत्रीय मांगों को लेकर भाकियू का उरई कलेक्ट्रेट पर उग्र प्रदर्शन, प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई (जालौन) :देश के अन्नदाताओं, कृषि मजदूरों और ग्रामीण भारत से जुड़े ज्वलंत एवं गंभीर मुद्दों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में एक बार फिर हुंकार भरी है। भाकियू के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने उरई स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन के राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन की अगुवाई में किसानों ने कलेक्ट्रेट पर डेरा डालकर अपनी ताकत का अहसास कराया और अंततः जिलाधिकारी जालौन राजेश कुमार पांडेय के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए सरकार से किसानों की समस्याओं के तत्काल और स्थायी समाधान की पुरजोर मांग की गई है।
चार दशकों से जारी संघर्ष और कृषि क्षेत्र पर मंडराता गंभीर संकट

प्रदर्शन के दौरान भाकियू के राष्ट्रीय नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि उनका संगठन पिछले चार दशकों से अधिक समय से देश के किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह लोकतांत्रिक, अनुशासित एवं शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करता आ रहा है। वक्ताओं ने चेताया कि वर्तमान समय में देश का कृषि क्षेत्र एक अभूतपूर्व और गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। खेती की लागत आसमान छू रही है, डीजल, बिजली, बीज और उन्नत कृषि यंत्रों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके विपरीत किसानों को उनकी खून-पसीने की मेहनत से उगाई गई उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
देश के कई राज्यों में गन्ना किसानों का करोड़ों रुपये का भुगतान आज भी लंबित है, जिससे उनका घरेलू बजट चरमरा गया है। इसके अलावा, उर्वरकों की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता न होना तथा प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को लगातार हो रहे भारी आर्थिक नुकसान ने खेती को एक घाटे का सौदा बना दिया है। ज्ञापन में इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई कि देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़, अतिवृष्टि, सूखा, भूस्खलन और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने किसानों की आजीविका को बुरी तरह तबाह कर दिया है। सरकार की ओर से मिलने वाली राहत राशि नाकाफी साबित हो रही है, जिससे ग्रामीण अंचल में भुखमरी और निराशा का माहौल पैदा हो रहा है।
मुक्त व्यापार समझौतों और वादों की अनदेखी पर तीखा आक्रोश
भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते समेत विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन का स्पष्ट मानना है कि यदि कृषि और डेयरी क्षेत्र को पर्याप्त सुरक्षा कवच के बिना विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खोल दिया गया, तो इसका सीधा और घातक असर देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों, दुग्ध उत्पादकों तथा संपूर्ण ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। विदेशी सब्सिडी वाले कृषि उत्पादों के अंधाधुंध आयात से भारतीय कृषि बाजार ध्वस्त हो जाएगा, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था, सार्वजनिक खरीद प्रणाली और देश की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह से खतरे में पड़ जाएगी।
इसके साथ ही, संगठन ने 9 दिसंबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) को केंद्र सरकार द्वारा दिए गए लिखित आश्वासनों को अब तक पूरा न किए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया। भाकियू ने कहा कि सरकार ने किसानों के साथ लगातार छलावा किया है, जिसे अब और सहन नहीं किया जाएगा।
प्रधानमंत्री को सौंपी गई 9 प्रमुख मांगें
भाकियू ने प्रधानमंत्री से निम्नलिखित 9 प्रमुख मांगों पर तत्काल और सकारात्मक निर्णय लेने की पुरजोर अपील की है:
- एमएसपी की कानूनी गारंटी: स्वामीनाथन आयोग की सी-2+50 प्रतिशत फार्मूले के आधार पर देश की सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद का देशव्यापी कानून बनाया जाए।
- गन्ना मूल्य में वृद्धि: गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) न्यूनतम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए और सभी लंबित गन्ना बकाये का भुगतान ब्याज सहित तुरंत कराया जाए।
- कर्ज मुक्ति और मुफ्त बिजली: देश के सभी किसानों एवं कृषि मजदूरों का संपूर्ण ऋण माफ किया जाए, भविष्य के लिए ब्याज मुक्त कृषि ऋण दिए जाएं। खेती के लिए मुफ्त बिजली और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए।
- स्मार्ट मीटर और निजीकरण का विरोध: प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की व्यवस्था और बिजली वितरण के निजीकरण की जनविरोधी प्रक्रिया को तुरंत वापस लिया जाए।
- संशोधित कानूनों की वापसी: चारों श्रम संहिताओं, बीज विधेयक, राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति और राष्ट्रीय सहकारिता नीति को तत्काल रद्द किया जाए।
- मनरेगा सुधार: मनरेगा योजना के तहत साल में 200 दिन का रोजगार और न्यूनतम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की गारंटी सुनिश्चित की जाए।
- उर्वरक उपलब्धता: डीएपी, यूरिया और अन्य आवश्यक उर्वरकों की निर्बाध व पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, सब्सिडी बहाल हो तथा कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
- राष्ट्रीय आपदा घोषित: बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित किया जाए, जिससे प्रभावित किसानों, बंटाईदारों और कृषि मजदूरों को समुचित मुआवजा मिले।
- पारदर्शी फसल बीमा: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की उच्चस्तरीय समीक्षा कर सार्वजनिक क्षेत्र आधारित पूरी तरह पारदर्शी फसल और पशुधन बीमा व्यवस्था लागू की जाए।
किसान नेताओं की दो टूक चेतावनी
बाइट (राजवीर सिंह जादौन, राष्ट्रीय महासचिव, भाकियू):
“आज देश का किसान दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार बड़े घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए नीतियां बना रही है, जबकि अन्नदाता सड़क पर है। यदि सरकार ने एमएसपी की कानूनी गारंटी और हमारी 9 सूत्रीय मांगों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो भारतीय किसान यूनियन पूरे देश में आर-पार की एक बड़ी और उग्र लड़ाई छेड़ने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
इस प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भाकियू प्रतिनिधिमंडल की बातें धैर्यपूर्वक सुनीं और ज्ञापन को सर्वोच्च स्तर पर प्रेषित करने का आश्वासन दिया। प्रदर्शन में प्रमुख रूप से कई स्थानीय किसान नेता, कृषि मजदूर और ग्रामीण अंचल से आए लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।






