नरक में जीने को मजबूर राजेंद्र नगर के बाशिंदे: जर्जर सड़क और जलभराव के खिलाफ फूटा गुस्सा, कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई, जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के मुख्यालय उरई में नागरिकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। बुनियादी सुविधाओं से वंचित जनता ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शहर के राजेंद्र नगर वार्ड संख्या 21 के स्थानीय लोगों ने वर्षों से चली आ रही गंभीर समस्याओं से त्रस्त होकर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। बारिश के दिनों में जलभराव और टूटी-फूटी सड़कों के बीच जीवन गुजारने को मजबूर इन नागरिकों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर तत्काल प्रभाव से राहत दिलाए जाने की पुरजोर मांग की है।
वर्षों से बदहाल है राजेंद्र नगर वार्ड 21 की तस्वीर
उरई नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राजेंद्र नगर वार्ड 21 के निवासियों का कहना है कि उनके इलाके में विकास कार्य केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। ज़मीनी हकीकत यह है कि यहां की सड़कें पूरी तरह से उखड़ चुकी हैं और जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि पैदल चलना भी दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र की सड़कों का निर्माण या पुनरुद्धार नहीं कराया गया है, जिससे यह मार्ग आवागमन के पूरी तरह अनुपयुक्त हो चुके हैं।
जलभराव ने बढ़ाई मुसीबतें, मानसून में नर्क बनता है जीवन
जर्जर सड़कों के अलावा इस क्षेत्र के लोगों के लिए जलभराव एक अभिशाप बन गया है। हल्की सी बारिश होते ही राजेंद्र नगर वार्ड 21 की गलियां तालाब में तब्दील हो जाती हैं। नालियों की नियमित सफाई न होने और जल निकासी का उचित प्रबंध न होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर भर जाता है। इसके चलते स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। गंदे पानी के जमा होने से क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों फैलने का खतरा भी लगातार मंडरा रहा है, जिससे स्थानीय वाशिंदों में भारी दहशत और आक्रोश है।
शिकायतों के बाद भी प्रशासनिक सुस्ती पर फूटा गुस्सा
प्रदर्शन में शामिल स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले। महीनों और वर्षों बीत जाने के बावजूद ज़मीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों की इस उदासीनता और टालमटोल रवैये से आजिज आकर आखिरकार लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ा और कलेक्ट्रेट का रुख करना पड़ा।
डीएम से लगाई न्याय की गुहार, त्वरित कार्रवाई का अल्टीमेटम
कलेक्ट्रेट पहुंचे आक्रोशित नागरिकों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने मांग की कि बरसात के इस मौसम में तुरंत विशेष टीमें भेजकर जलभराव की निकासी का प्रबंध किया जाए और जल्द से जल्द सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए।
जिलाधिकारी ने स्थानीय लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों को जांच कर शीघ्र आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। बहरहाल, जनता की इस हुंकार ने यह साबित कर दिया है कि यदि बुनियादी नागरिक सुविधाओं की अनदेखी की गई, तो जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस दिशा में कितनी जल्दी राहत भरी कार्रवाई को अमलीजामा पहनाता है।






