उरई जिला अस्पताल में हाई-वोल्टेज ड्रामा: जिला पंचायत सदस्य और डॉक्टर के बीच तीखी नोकझोंक, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

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उरई के जिला अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड के भीतर जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र सिंह सेंगर और डॉक्टर समीर के बीच तीखी बहस का दृश्य, जहाँ लोग बीच-बचाव करते नजर आ रहे हैं

रिपोर्ट : राहुल,जालौन। UP SAMVAD

उरई (जालौन): जनपद के मुख्य चिकित्सालय में उस समय अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया, जब एक रसूखदार जनप्रतिनिधि और ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक के बीच गंभीर बहस छिड़ गई। सहाव क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र सिंह सेंगर और इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर समीर के बीच हुई इस नोकझोंक का वीडियो अब सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा और जनप्रतिनिधियों के व्यवहार पर नई बहस छेड़ दी है।
​विवाद की जड़: पोस्टमार्टम कागजों पर हस्ताक्षर का मामला
​प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र सिंह सेंगर अपने किसी परिचित के शव का पोस्टमार्टम जल्द कराने के उद्देश्य से जिला अस्पताल पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि पोस्टमार्टम की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कुछ अनिवार्य दस्तावेजों पर इमरजेंसी डॉक्टर के हस्ताक्षर की आवश्यकता थी।
​प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कागजों पर हस्ताक्षर कराने की बात को लेकर पुष्पेंद्र सिंह सेंगर और ड्यूटी डॉक्टर समीर के बीच बातचीत शुरू हुई, जो कुछ ही पलों में तीखी बहस में तब्दील हो गई। अस्पताल के गलियारों में दोनों पक्षों के बीच ऊँची आवाज में हुई इस बातचीत से वहां मौजूद मरीज और उनके तीमारदार सहम गए।
​सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ‘सत्ता का रसूख’
​घटना के दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जिला पंचायत सदस्य काफी आक्रोशित मुद्रा में हैं और डॉक्टर समीर से तीखे लहजे में बात कर रहे हैं। वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय चिकित्सा जगत में रोष है। कई लोगों ने इसे ‘ऑन-ड्यूटी’ डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार और कार्य में बाधा डालने का प्रयास बताया है। वहीं, सोशल मीडिया पर लोग इसे जनप्रतिनिधि की दबंगई से जोड़कर देख रहे हैं।
​जिला पंचायत सदस्य ने दी अपनी सफाई
​मामला तूल पकड़ते देख पुष्पेंद्र सिंह सेंगर ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि उनका इरादा किसी भी चिकित्सक का अपमान करना नहीं था। सेंगर के मुताबिक, “मैं केवल शोक संतप्त परिवार की मदद के लिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को समय पर पूरा कराने का प्रयास कर रहा था। वहां मौजूद अन्य डॉक्टरों ने ही मुझे हस्ताक्षर के लिए डॉक्टर समीर के पास भेजा था। देरी होने के कारण केवल तर्क-वितर्क हुआ था, जिसे कुछ लोग गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।”
​पूर्व विधायक के पुत्र हैं पुष्पेंद्र सिंह सेंगर
​गौरतलब है कि पुष्पेंद्र सिंह सेंगर की राजनीतिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत है। वह माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर के पुत्र हैं। प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखने के कारण इस मामले ने जिले के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ जहां डॉक्टर संगठन इस मुद्दे पर गोलबंद हो सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ समर्थक इसे जनता की सेवा के दौरान हुई एक सामान्य गरमा-गरमी करार दे रहे हैं।
​प्रशासनिक चुप्पी और गहराता सस्पेंस
​इस पूरे हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम के बावजूद जिला अस्पताल प्रशासन और स्थानीय पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक लिखित शिकायत या बयान जारी नहीं किया गया है। अस्पताल के उच्चाधिकारी इस मामले में फिलहाल कुछ भी कहने से बच रहे हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अंदरूनी तौर पर मामले को शांत करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है।

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