महाकवरेज: जालौन में परिंदा भी नहीं मार सका पर! टीजीटी परीक्षा में प्रशासन का चक्रव्यूह देख आधे से ज्यादा अभ्यर्थियों ने खड़े किए हाथ, छोड़ी परीक्षा

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उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में टीजीटी परीक्षा केंद्र के बाहर मुस्तैद पुलिस बल, अंदर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय व पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह द्वारा परीक्षा कक्षों का कड़ाई से निरीक्षण किए जाने की एक विस्तृत कोलाज तस्वीर।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (प्रयागराज) द्वारा आयोजित प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) लिखित परीक्षा के दौरान बुधवार को जनपद जालौन में जो नजारा देखने को मिला, उसने सूबे की प्रतियोगी परीक्षाओं के इतिहास में शुचिता का एक नया पैमाना तय कर दिया है। शासन के कड़े तेवरों और जिला प्रशासन के अचूक चक्रव्यूह का असर यह रहा कि मुन्नाभाइयों और नकल माफियाओं के हौसले पस्त हो गए। खौफ का आलम यह था कि दोनों पालियों में आधे से अधिक पंजीकृत अभ्यर्थियों ने परीक्षा कक्ष में कदम रखने के बजाय मैदान छोड़ना ही बेहतर समझा। खोजी पत्रकारिता की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की जुगलबंदी ने परीक्षा को पूरी तरह अभेद्य बना दिया।

​अभेद्य किला बने सातों केंद्र: डीएम और एसपी की ‘कमांडो’ चेकिंग से मचा हड़कंप

​बुधवार सुबह जैसे ही टीजीटी परीक्षा की पहली पाली की घंटी बजी, पूरा जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया। जनपद में बनाए गए सभी 7 परीक्षा केंद्रों को मानो एक छावनी में तब्दील कर दिया गया था। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह खुद ग्राउंड जीरो पर उतरे।

​अधिकारियों का काफिला जब एक के बाद एक केंद्रों पर औचक निरीक्षण के लिए पहुंचा, तो वहां हड़कंप मच गया। अभ्यर्थियों की मेटल डिटेक्टर से लेकर सघन फिजिकल तलाशी ली जा रही थी। डीएम राजेश कुमार पाण्डेय ने साफ लफ्जों में केंद्र व्यवस्थापकों को चेतावनी दी कि यदि आयोग के दिशा-निर्देशों में रत्ती भर भी लापरवाही मिली, तो कार्रवाई सीधे जेल भेजने की होगी। सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड की खुद पुलिस अधीक्षक ने मॉनिटरिंग की, जिससे नकल की गुंजाइश शून्य हो गई।

​आंकड़े दे रहे गवाही: प्रशासन की सख्ती के आगे 2600 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने टेके घुटने!

​इस परीक्षा के जो आधिकारिक आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और खोजी नजरिए से बेहद संवेदनशील हैं। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो साफ पता चलता है कि कड़ाई के डर से अभ्यर्थियों में भारी खौफ था:

परीक्षा पालीकुल पंजीकृत अभ्यर्थीउपस्थित अभ्यर्थीअनुपस्थित अभ्यर्थीअनुपस्थिति का प्रतिशत
प्रथम पाली27881269151954.48%
द्वितीय पाली212710331094

पहली पाली में जहां 1519 अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ी, वहीं दूसरी पाली में भी 1094 अभ्यर्थी गायब रहे। कुल मिलाकर 2613 अभ्यर्थियों का परीक्षा छोड़ना इस बात का सीधा संकेत है कि उत्तर प्रदेश में अब बिना तैयारी और “जुगाड़” के दम पर परीक्षा पास करने का दौर पूरी तरह खत्म हो चुका है।

​सेक्टर और स्टैटिक मजिस्ट्रेटों का पहरा, खुफिया टीमें भी रहीं सक्रिय

​परीक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए हर केंद्र पर स्टैटिक मजिस्ट्रेट मुस्तैद थे, जो पल-पल की रिपोर्ट कंट्रोल रूम को भेज रहे थे। इसके साथ ही सेक्टर मजिस्ट्रेटों की गाड़ियां लगातार जनपद की सड़कों पर दौड़ती नजर आईं। परीक्षा केंद्रों के बाहर और आसपास की फोटोकॉपी की दुकानों, साइबर कैफे और संदिग्ध ठिकानों पर सादे कपड़ों में खुफिया पुलिस की टीमें सक्रिय थीं, ताकि किसी भी तरह की अवांछनीय गतिविधि या अफवाह को पनपने से पहले ही कुचला जा सके।

​”शुचिता से समझौता मुमकिन नहीं”: जिलाधिकारी और कप्तान का कड़ा संदेश

​परीक्षा के सफल और शांतिपूर्ण समापन के बाद मीडिया से बात करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने दोटूक कहा, “प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना हमारी और शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमने हर केंद्र पर विशेष सतर्कता इसीलिए बरती ताकि योग्य और मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके।”

​वहीं, पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने सुरक्षा ग्रिड की सफलता पर बात करते हुए कहा कि पुलिस की मोबाइल टीमें लगातार भ्रमणशील थीं। केंद्रों के बाहर पर्याप्त पुलिस बल तैनात था, जिसके कारण कोई भी शरारती तत्व परीक्षा के आसपास फटकने की हिम्मत नहीं कर सका। जालौन में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई यह परीक्षा प्रदेश के अन्य जिलों के लिए एक नजीर बन गई है।

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