जालौन में आंधी-तूफान का कहर: भीषण आग की चपेट में आने से तीन परिवार हुए बेघर, दाने-दाने को मोहताज पीड़ितों ने डीएम से लगाई मुआवजे की गुहार

0
जालौन के डकोर ब्लॉक स्थित सिमिरिया गांव में आंधी-तूफान के कारण लगी आग के बाद जले हुए मकान, राख हुआ गृहस्थी का सामान और जिलाधिकारी कार्यालय में न्याय की गुहार लगाते हुए बेघर पीड़ित ग्रामीण व ग्राम प्रधान।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन (उत्तर प्रदेश)। जनपद के डकोर ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिमिरिया में बीते दिनों आए भीषण आंधी-तूफान के दौरान लगी आग ने तीन गरीब परिवारों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। इस भयावह घटना में ग्रामीणों का सब कुछ जलकर खाक हो चुका है। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस आर्थिक मदद न मिलने से नाराज पीड़ित परिवारों ने बुधवार को ग्राम प्रधान के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया। पीड़ितों ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को एक शिकायती पत्र सौंपकर तत्काल उचित मुआवजा दिलाए जाने और आपदा की इस घड़ी में राहत पहुंचाने की गुहार लगाई है।

रात के अंधेरे में काल बनकर आई आंधी, चंद मिनटों में राख हुई जिंदगी की कमाई

​घटनाक्रम के अनुसार, बीती 28 मई 2026 की रात को क्षेत्र में अचानक तेज आंधी और तूफान ने दस्तक दी थी। इसी दौरान ग्राम सिमिरिया में अचानक अज्ञात कारणों से चिंगारी भड़क गई, जिसने तेज हवाओं के साथ विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें इतनी भीषण थीं कि उन्होंने ग्रामीण राकेश कुमार समेत गांव के कुल तीन परिवारों के मकानों को अपनी चपेट में ले लिया।

​जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते और आग पर काबू पाने का प्रयास करते, तब तक मकानों के भीतर रखा पूरा गृहस्थी का सामान जलकर राख हो गया। इस अग्निकांड में पीड़ितों के घरों में रखा सालभर का अनाज, खाने-पीने की सामग्री, बर्तन, बिस्तर, कपड़े और जीवनभर की जमा-पूंजी (नकदी) पूरी तरह जल गई। स्थिति यह है कि पीड़ितों के पास अब पहनने के लिए कपड़े और खाने के लिए अन्न का एक दाना तक नहीं बचा है।

आधे जले नोट बन गए जी का जंजाल, बदलवाने के लिए भटक रहे पीड़ित

​इस भीषण त्रासदी का एक दर्दनाक पहलू यह भी है कि आगजनी में इन परिवारों के घरों में रखी नकदी भी जल गई। कुछ नोट बेहद खराब स्थिति में आधे जले हुए बचे हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे इन आधे जले हुए नोटों को लेकर बैंकों और अन्य जगहों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई भी इन्हें बदलने को तैयार नहीं है। बाजार में इन नोटों से कोई सामग्री नहीं मिल रही है, जिसके कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

नेताओं और अफसरों के आश्वासन हवा, हफ़्तों बाद भी राहत का इंतजार

​घटना के तुरंत बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया था। सूचना मिलते ही राजस्व विभाग के लेखपाल, स्थानीय थाना पुलिस और उरई के क्षेत्रीय विधायक ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का मुआयना किया था। उस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया था और जल्द से जल्द उचित सरकारी सहायता व मुआवजा दिलाने का पुरजोर आश्वासन दिया था।

​परंतु, विडंबना यह है कि घटना को कई दिन बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर प्रभावित परिवारों को फूटी कौड़ी तक नसीब नहीं हुई है। प्रशासन की इस कछुआ चाल और उदासीनता के कारण पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने और दाने-दाने के लिए तरसने को मजबूर हैं।

ग्राम प्रधान की अगुवाई में कलेक्ट्रेट पहुंचे पीड़ित, शीघ्र मदद की मांग

​प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर आज सिमिरिया गांव के ग्राम प्रधान विनय राजपूत की अगुवाई में भारी संख्या में ग्रामीण और पीड़ित परिवार जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे।

बाइट: विनय राजपूत (ग्राम प्रधान)

“गांव के तीन गरीब परिवारों का इस आगजनी में सब कुछ खत्म हो चुका है। शासन-प्रशासन के लोग केवल मुआयना करके चले गए, लेकिन अभी तक इन बेघरों को कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है। हम जिलाधिकारी महोदय से मांग करने आए हैं कि इन्हें तत्काल आवास और मुआवजा दिया जाए, ताकि ये अपना जीवन दोबारा शुरू कर सकें।”

​कलेक्ट्रेट पहुंची एक पीड़िता ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई और कहा कि उनके पास अब बच्चों को खिलाने के लिए भी कुछ नहीं बचा है। प्रशासन को उनके जले हुए नोट बदलवाने में मदद करनी चाहिए और तुरंत मुआवजा राशि स्वीकृत करनी चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पीड़ितों को सहायता नहीं मिली, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित जांच कर नियमानुसार मुआवजा राशि जारी करने के निर्देश दिए हैं।

Leave a Reply

You may have missed