महा-मंथन या प्रशासनिक अल्टीमेटम? जालौन में 5 जून से शुरू होने जा रहा 17 दिनों का सबसे बड़ा ‘सरकारी चक्रव्यूह’, DM का कड़ा रुख; लापरवाह अधिकारियों में हड़कंप!

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई (जालौन) : केंद्र सरकार के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर बुंदेलखंड के जालौन जनपद में एक अभूतपूर्व और बेहद आक्रामक प्रशासनिक हलचल शुरू हो चुकी है। आगामी 5 जून से लेकर 21 जून 2026 तक पूरे जिले में एक व्यापक जनकल्याण एवं जन-जागरूकता महाअभियान चलाया जाएगा। इस 17 दिवसीय अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए बुधवार देर शाम विकास भवन स्थित रानी लक्ष्मीबाई सभागार में एक बेहद हाई-प्रोफाइल और मैराथन बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी (DM) राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के तेवर इतने तीखे थे कि विभिन्न विभागों के अधिकारियों की धड़कनें तेज हो गईं। जिलाधिकारी ने दोटूक शब्दों में साफ कर दिया है कि योजनाओं का लाभ हर हाल में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, इसमें किसी भी स्तर पर हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आधी रात तक चला फाइलों का खेल; DM ने खींची ‘लक्ष्मण रेखा’
बुधवार की शाम जब आम लोग अपने घरों की तरफ लौट रहे थे, तब विकास भवन का रानी लक्ष्मीबाई सभागार गंभीर चर्चाओं और फाइलों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले इस महाअभियान की तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा की।
DM ने बैठक में मौजूद आला अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देश देते हुए कहा:
”यह अभियान केवल कागजी आंकड़ों और रस्म अदायगी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में संचालित सुशासन और विकास परियोजनाओं की सीधी गूंज जनता के बीच सुनाई देनी चाहिए। सभी विभाग आपसी तालमेल को मजबूत करें और अपनी विभागीय योजनाओं की सूची तैयार कर सीधे ग्राउंड पर उतरें।”
प्रशासनिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, बैठक में कई विभागों के ढीले कामकाज को लेकर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी भी जताई और ऑन-द-स्पॉट सुधार के निर्देश दिए।
पर्यावरण से लेकर योग तक: 17 दिनों का पूरा ‘ब्लूप्रिंट’ आया सामने, जानिए कब क्या होगा
खोजी पत्रकारिता के तहत जब हमने इस 17 दिवसीय सरकारी अभियान के पूरे टाइमटेबल को खंगाला, तो सामने आया कि प्रशासन ने जिले को पूरी तरह मथने की तैयारी कर ली है:
- 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस): अभियान का शंखनाद एक वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम से होगा। इसके लिए वन विभाग, पंचायती राज, ग्राम्य विकास और शिक्षा विभाग को सीधे तौर पर जिम्मेदार बनाया गया है।
- 8 से 14 जून (विशेष जनसंपर्क): इस दौरान अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद एयरकंडीशन कमरों से बाहर निकलकर तपती धूप में जनता के बीच जाएंगे, संवाद करेंगे और मौके पर ही समस्याओं का निस्तारण करेंगे।
- 11 से 14 जून (मीडिया संवाद): इस अवधि में सरकार की 12 साल की उपलब्धियों और विकास कार्यों का पूरा लेखा-जोखा मीडिया के सामने सार्वजनिक किया जाएगा।
’जनकल्याण शिविर’ और ‘स्वास्थ्य मेले’ से कटेगा बिचौलियों का पत्ता
इस महाअभियान का सबसे आक्रामक और महत्वपूर्ण चरण 14 जून से 16 जून के बीच देखने को मिलेगा। इन तीन दिनों में पूरे जनपद में ‘जनकल्याण शिविर’ और ‘स्वास्थ्य मेलों’ का जाल बिछाया जाएगा। इस दौरान आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना तथा मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना जैसी भारी-भरकम योजनाओं के फॉर्म न केवल भरे जाएंगे, बल्कि पात्र लाभार्थियों को उनका अधिकार तुरंत ट्रांसफर किया जाएगा।
इसके तुरंत बाद, 16 और 17 जून को ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ के जरिए किसानों, डॉक्टरों, उद्यमियों और युवाओं से सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा, जबकि 17 से 20 जून तक भव्य विकास प्रदर्शनियों के माध्यम से सूबे की कानून-व्यवस्था, औद्योगिक विकास और सांस्कृतिक धरोहर में आए बदलावों को जनता के सामने लाइव शोकेस किया जाएगा।
’रात्रि चौपाल’ का हंटर: ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात बाबू और अधिकारियों की उड़ी नींद
ग्रामीण इलाकों में अक्सर शिकायतें आती हैं कि सरकारी योजनाएं कागजों से उतरकर गांवों तक नहीं पहुंचतीं। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने ‘रात्रि चौपाल’ और ‘क्षेत्रीय भ्रमण’ का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। डीएम ने सख्त हिदायत दी है कि अधिकारी रात में गांवों में रुकेंगे, चौपाल लगाएंगे और किसानों की समस्याओं को ऑन-द-स्पॉट निपटाएंगे। इसके अलावा, 18 और 19 जून को प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण को लेकर विशेष कार्यशालाएं होंगी, और अंत में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पूरा जालौन एक सुर में योग करेगा।
मॉनिटरिंग का डिजिटल जाल: वीडियोग्राफी और दैनिक रिपोर्ट का कड़ा पहरा
इस बार अधिकारी केवल फाइलों में हेरफेर करके नहीं बच पाएंगे। जिलाधिकारी ने साफ कर दिया है कि हर एक कार्यक्रम की नियमित मॉनिटरिंग होगी। प्रत्येक गतिविधि की हाई-क्वालिटी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी गई है। हर दिन की प्रोग्रेस रिपोर्ट सीधे कलेक्ट्रेट को भेजी जाएगी।
इस हाई-लेवल बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राजीव राज, अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद मौर्य, प्रभागीय वनाधिकारी प्रदीप यादव, नगर मजिस्ट्रेट सुनील कुमार, परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, जिला विकास अधिकारी प्रशांत पाण्डेय और राम अयोध्या प्रसाद समेत तमाम विभागों के विभागाध्यक्ष मौजूद रहे। अब देखना यह है कि जिलाधिकारी के इस आक्रामक और सख्त रुख के बाद जालौन का प्रशासनिक अमला इस 17 दिवसीय महाअभियान को जमीन पर कितना मुस्तैदी से उतार पाता है।






