महाजाम और नो-एंट्री के चक्रव्यूह में फंसा जालौन का करोड़पति ट्रांसपोर्ट व्यापार! डीएम दरबार पहुंचे आक्रोशित व्यापारी, दी बड़ी चेतावनी

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जालौन के उरई में जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष तरुण तिवारी और अन्य आक्रोशित व्यापारी, जो हाथ में जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को संबोधित ज्ञापन थामे हुए गंभीर मुद्रा में खड़े हैं।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई (जालौन)। बुंदेलखंड के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक, जालौन (उरई) का ट्रांसपोर्ट व्यवसाय इस समय प्रशासनिक अनदेखी और अव्यवहारिक यातायात नियमों के चलते दम तोड़ रहा है। करोड़ों रुपये के टर्नओवर वाले इस सेक्टर में पैदा हुए अभूतपूर्व संकट को लेकर अब व्यापारियों का सब्र का बांध टूट गया है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले एकजुट हुए सैकड़ों ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों ने जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को एक तीखा शिकायती पत्र सौंपकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

​खोजी पत्रकारिता में यह बात सामने आई है कि शहर की अव्यवस्थित यातायात प्रणाली और नो-एंट्री के बेतरतीब नियमों ने स्थानीय सप्लाई चेन की कमर तोड़कर रख दी है, जिससे न सिर्फ व्यापारी बल्कि आम उपभोक्ता भी महंगाई और सामान की किल्लत से जूझने को मजबूर है।

​नो-एंट्री का ‘फांस’: आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन ठप, कालाबाजारी की आशंका

​व्यापारियों का सबसे बड़ा आक्रोश शहर में लागू की गई प्रशासनिक नो-एंट्री व्यवस्था को लेकर है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष तरुण तिवारी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के दायरे में आने वाली रोजमर्रा की चीजों (जैसे दूध, सब्जी, राशन और दवाइयां) को ढोने वाले वाहनों को भी नो-एंट्री के नाम पर घंटों शहर के बाहर रोक दिया जाता है।

​यदि यह गतिरोध कुछ दिन और चला, तो उरई और आसपास के बाजारों में कृत्रिम किल्लत पैदा हो जाएगी, जिससे कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा। व्यापारियों की स्पष्ट मांग है कि आवश्यक वस्तुओं से लदे वाहनों को नो-एंट्री के प्रतिबंध से पूरी तरह मुक्त रखा जाए ताकि जनता तक समय पर रसद पहुंच सके।

​’छोटा हाथी’ और ‘पिकअप’ पर पहरा: विशेष पास के बिना माल ढुलाई बनी आफत

​ग्राउंड जीरो से मिली रिपोर्ट के अनुसार, बड़े ट्रकों से माल उतरने के बाद उसे दुकानों तक पहुंचाने का जिम्मा ‘छोटा हाथी’, ‘पिकअप’ और अन्य हल्के मालवाहक वाहनों का होता है। लेकिन स्थानीय पुलिस और यातायात विभाग द्वारा इन छोटे वाहनों को भी शहर के भीतर दाखिल होने से रोका जा रहा है या चालान का शिकार बनाया जा रहा है।

​व्यापार मंडल ने जिलाधिकारी के सामने यह प्रस्ताव रखा है कि इन हल्के व्यावसायिक वाहनों के लिए प्रशासन द्वारा ‘विशेष आवागमन पास’ जारी किए जाएं। बिना पास के शहर के भीतर माल की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो चुकी है, जिससे फुटकर दुकानदारों का धंधा चौपट होने की कगार पर है।

​सुबह की ‘लूट’ और पुलिसिया रोक-टोक: खाली वाहनों को बंधक बनाने का खेल!

​व्यापारिक नेताओं ने एक और गंभीर मुद्दे की तरफ इशारा किया है। नियमों के मुताबिक, सुबह के समय जो वाहन शहर के भीतर माल उतारने आते हैं, उन्हें माल खाली करने के बाद तुरंत वापस लौटने की अनुमति होनी चाहिए। लेकिन हकीकत इसके उलट है।

​व्यापारियों का आरोप है कि माल खाली कर चुके खाली वाहनों को भी वापस लौटते समय बेवजह रोका जाता है, जिससे सड़कों पर जाम की स्थिति और बदतर हो जाती है। व्यापारियों ने दोटूक कहा कि माल खाली कर चुके वाहनों की वापसी बिना किसी रोक-टोक के सुनिश्चित की जाए, ताकि यातायात का दबाव स्वतः कम हो सके।

​फाइलों में दफन ‘ट्रांसपोर्ट नगर’: कब मिलेगा उरई को जाम से परमानेंट परचा?

​इस पूरे विवाद की जड़ उरई शहर में एक व्यवस्थित ‘ट्रांसपोर्ट नगर’ का न होना है। पिछले कई सालों से कागजों पर चल रही ट्रांसपोर्ट नगर की योजना आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। व्यापारियों का कहना है कि जब तक शहर के बाहर एक सर्वसुविधायुक्त ट्रांसपोर्ट नगर स्थापित नहीं किया जाता, तब तक भारी वाहनों का दबाव शहर पर बना रहेगा। ट्रांसपोर्ट नगर बनने से न केवल माल ढुलाई का काम एक छत के नीचे व्यवस्थित होगा, बल्कि उरई वासियों को रोजाना लगने वाले जानलेवा ट्रैफिक जाम से भी हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

डीएम का आश्वासन और व्यापारियों का अल्टीमेटम:

इस संवेदनशील मामले पर जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने व्यापार मंडल के प्रतिनिधिमंडल को ध्यान से सुना और आश्वस्त किया कि वे जल्द ही पुलिस और यातायात विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यावहारिक समाधान निकालेंगे। हालांकि, तरुण तिवारी के नेतृत्व में व्यापारियों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक और जमीनी कार्रवाई नहीं हुई, तो व्यापार मंडल उरई बंद करने और चक्का जाम करने जैसे कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

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