डीएम के औचक निरीक्षण से जिला अस्पताल में हड़कंप: अव्यवस्थाओं पर बरसे जिलाधिकारी, सुधार न होने पर दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

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जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय उरई के पुरुष जिला अस्पताल में बंद पड़े वाटर कूलर और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन/उरई: उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन में सोमवार को उस समय प्रशासनिक अमले और स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई, जब जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय अचानक उरई स्थित पुरुष जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुँच गए। गर्मी के मौसम में मरीजों को मिल रही सुविधाओं की जमीनी हकीकत परखने निकले डीएम को निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं में भारी खामियां देखने को मिलीं। पेयजल से लेकर वार्डों में कूलिंग सिस्टम तक, हर मोर्चे पर अस्पताल प्रशासन विफल नजर आया, जिस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

भीषण गर्मी में प्यासे मरीज: बंद मिले वाटर कूलर

​निरीक्षण की शुरुआत में ही जिलाधिकारी ने सबसे पहले अस्पताल परिसर में पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार होने के बावजूद अस्पताल में लगे वाटर कूलर बंद मिले। यह देखकर डीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को तलब किया और कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि ऐसी भीषण गर्मी में मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए पानी की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? डीएम ने तत्काल प्रभाव से सभी वाटर कूलरों को ठीक कराने और स्वच्छ पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए।

वार्डों में बदहाली: बंद कूलर और मरीजों की बेबसी

​जब जिलाधिकारी वार्डों का निरीक्षण करने पहुंचे, तो वहां की स्थिति और भी चिंताजनक थी। कई वार्डों में कूलर बंद पड़े थे, जिससे भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल थे। जिलाधिकारी ने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में स्वास्थ्य विभाग की यह संवेदनहीनता बर्दाश्त के बाहर है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) को निर्देशित किया कि वार्डों में केवल कूलर ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त एयर कंडीशनर (AC) की व्यवस्था भी की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों के इलाज और उनके आराम में किसी भी स्तर पर कोताही को लापरवाही माना जाएगा।

OPD में मरीजों की लंबी कतारें और मैनपावर का अभाव

​ओपीडी ब्लॉक के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने देखा कि पर्चा काउंटर और डॉक्टरों के कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगी हुई थीं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी प्रबंधन नहीं दिखा। जांच में सामने आया कि कर्मचारियों की कमी के कारण कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है। डीएम ने अस्पताल प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि मरीजों को घंटों इंतजार कराना अमानवीय है। उन्होंने सीएमएस आनंद उपाध्याय को तत्काल अतिरिक्त मैनपावर तैनात करने और ओपीडी व्यवस्था को व्यवस्थित करने के निर्देश दिए ताकि दूर-दराज से आए ग्रामीणों को समय पर उपचार मिल सके।

लापरवाही पर कड़ी फटकार और भविष्य की चेतावनी

​निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि “अस्पताल का काम सेवा करना है, न कि मरीजों की मुसीबतें बढ़ाना।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले निरीक्षण तक व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं पाई गईं, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध शासन को प्रतिकूल रिपोर्ट भेजी जाएगी और सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

​इस औचक निरीक्षण के बाद से ही जिला अस्पताल के गलियारों में सन्नाटा पसरा है और अस्पताल प्रशासन आनन-फानन में तकनीकी खराबियों को दूर करने और सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में जुट गया है। जिलाधिकारी की इस सक्रियता ने जनपद के अन्य सरकारी विभागों को भी सतर्क रहने का संदेश दिया है।

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