बुंदेलखंड में जालौन ने रचा इतिहास: फॉरेस्ट सर्वे रिपोर्ट में वन क्षेत्र बढ़ाने में मिला दूसरा स्थान, 6.41 वर्ग किमी बढ़ा जंगल

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन (उत्तर प्रदेश) : बुंदेलखंड के जालौन जिले से पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बेहद सुखद और संतोंषजनक खबर सामने आई है। जिला वन विभाग की दूरदर्शी नीतियों, कड़े परिश्रम और स्थानीय प्रशासन के समन्वय का परिणाम अब धरातल पर दिखने लगा है। नवीनतम फॉरेस्ट सर्वे रिपोर्ट के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जालौन जिले ने अपने पूरे ज़ोन (बुंदेलखंड क्षेत्र) में वन क्षेत्र की वृद्धि के मामले में दूसरा स्थान हासिल कर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। रिपोर्ट के अनुसार, जिले के कुल हरित आवरण (Green Cover) में 6.41 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कभी सूखे और कम हरियाली के लिए चर्चा में रहने वाले बुंदेलखंड के इस जिले में यह बदलाव पर्यावरणविदों और आम जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
नंदन, औषधि और अमृत वन मॉडल से बदली तस्वीर

जालौन जिले में वन क्षेत्र और हरित घनत्व (Green Density) को बढ़ाने के लिए वन विभाग ने पारंपरिक वृक्षारोपण से इतर आधुनिक और थीम-आधारित वनों को विकसित करने की रणनीति अपनाई। विभाग द्वारा जिले के विभिन्न चयनित क्षेत्रों में विशेष रूप से ‘नंदन वन’, ‘औषधि वन’, ‘अमृत वन’ और ‘एकता वन’ जैसी अनूठी परियोजनाएं शुरू की गईं।
इन विशेष वनों का मुख्य उद्देश्य न केवल पेड़ों की संख्या बढ़ाना था, बल्कि जैव विविधता (Biodiversity) को भी संरक्षित करना था। ‘औषधि वन’ में जहां पारंपरिक और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के पौधे रोपे गए, वहीं ‘अमृत वन’ और ‘नंदन वन’ को जल स्रोतों के समीप और सामुदायिक भागीदारी के साथ विकसित किया गया। इन प्रयासों के चलते न केवल पौधों के जीवित रहने की दर (Survival Rate) में अभूतपूर्व सुधार हुआ, बल्कि जिले का पारिस्थितिक तंत्र भी मजबूत हुआ है।
सालाना 45 लाख पौधों का रोपण और सख्त निगरानी प्रणाली
इस ऐतिहासिक सफलता की जमीनी हकीकत को साझा करते हुए जिला वन अधिकारी (DFO) प्रदीप कुमार ने बताया कि जिले को हरा-भरा बनाने का यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने कहा,
”वन विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष जिले में औसतन 45 लाख पौधों का रोपण किया जा रहा है। हमारा मुख्य ध्यान सिर्फ पौधा लगाने पर नहीं, बल्कि उन्हें पेड़ बनाने पर केंद्रित है।”
डीएफओ ने आगे जानकारी दी कि पौधों की सुरक्षा और उचित देखभाल सुनिश्चित करने के लिए केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन के अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारियों को मिलाकर एक संयुक्त और विशेष मॉनिटरिंग टीम का गठन किया गया है। यह अंतर्विभागीय टीम पौधों की नियमित निगरानी करती है। पौधों को समय पर खाद, पानी और कीटनाशकों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। इसी त्रिस्तरीय निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की वजह से लगाए गए पौधे सुरक्षित रह पा रहे हैं, जो अंततः घने जंगलों के रूप में तब्दील हो रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं: जालौन को ‘ग्रीन हब’ बनाने का संकल्प
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। आने वाले समय में भी जिले के बंजर और खाली पड़े सरकारी भूभागों को चिन्हित कर बड़े पैमाने पर सघन वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही, स्थानीय नागरिकों और युवाओं को इस अभियान से जोड़ने के लिए सामुदायिक वानिकी (Community Forestry) को और बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि जालौन को बुंदेलखंड ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख ‘ग्रीन हब’ के रूप में स्थापित किया जा सके।






