झांसी-जालौन लिंक एक्सप्रेस-वे: मुआवजे को लेकर भड़के किसान, सर्किल रेट बढ़ाने की मांग को लेकर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन (उत्तर प्रदेश) : उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक, झांसी-जालौन लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण की सुगबुगाहट के साथ ही धरातल पर विरोध के स्वर भी तेज होने लगे हैं। इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही कृषि भूमि के मुआवजे को लेकर स्थानीय किसानों में असंतोष की भावना गहरी होती जा रही है। सोमवार को तहसील क्षेत्र के ग्राम काबिलपुरा, तिमरो और फूलपुरा के दर्जनों प्रभावित किसानों ने जालौन कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय से मुलाकात की और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। किसानों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि भूमि का सर्किल रेट वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार संशोधित किया जाए और पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए।
बाजार मूल्य और सरकारी दरों में भारी विसंगति का आरोप
जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करते हुए किसानों ने प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। प्रभावित किसानों का नेतृत्व कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान में प्रशासन जिस सर्किल रेट के आधार पर मुआवजे का आकलन कर रहा है, वह वास्तविक बाजार मूल्य की तुलना में नगण्य है।
किसानों के अनुसार, पिछले लगभग नौ वर्षों से क्षेत्र के सर्किल रेट में कोई तार्किक या अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई है, जबकि इस समयावधि में क्षेत्र में जमीनों की कीमतों में बेतहाशा इजाफा हुआ है। किसानों ने दावा किया कि उनकी उपजाऊ भूमि का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 30 लाख रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच चुका है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज पुरानी दरें उन्हें इस मुनाफे और सही हक से वंचित कर रही हैं।
रणनीतिक स्थान होने के बावजूद कम मूल्यांकन पर नाराजगी
सौंपे गए ज्ञापन में किसानों ने भौगोलिक और व्यावसायिक पहलुओं को रेखांकित करते हुए बताया कि अधिग्रहित की जा रही भूमि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और अब प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेस-वे के अत्यंत निकट और आपस में जुड़ने वाले रणनीतिक बिंदुओं पर स्थित है। इस वजह से यह पूरी बेल्ट व्यावसायिक, आवासीय और औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और बहुमूल्य हो चुकी है।
”हमारी जमीनें अब केवल सामान्य कृषि भूमि नहीं रह गई हैं, बल्कि विकास परियोजनाओं के केंद्र में आने के कारण इनका व्यावसायिक मूल्य कई गुना बढ़ गया है। ऐसे में प्रशासन द्वारा दशकों पुराने ढर्रे पर भूमि का मूल्यांकन करना किसानों के साथ सीधे तौर पर अन्याय है।”
— प्रशांत कुमार, प्रभावित किसान
भूमिहीन होने की कगार पर किसान: आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने प्रशासन को अपनी व्यावहारिक समस्याओं से अवगत कराते हुए सचेत किया कि यदि उन्हें वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से कम मुआवजा दिया गया, तो वे भविष्य में उतनी ही या उससे आधी जमीन भी किसी अन्य स्थान पर खरीदने में पूरी तरह असमर्थ हो जाएंगे। इससे न केवल उनकी आजीविका छिन जाएगी, बल्कि उनके सामने अचानक भूमिहीन और बेरोजगार होने का एक बड़ा सामाजिक व आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से न्यायसंगत रुख अपनाने की अपील की है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया और सर्किल रेट में सुधार नहीं हुआ, तो वे अपनी जमीनों को बचाने और उचित मुआवजे के अधिकार के लिए बड़े स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए विवश होंगे। फिलहाल, जिलाधिकारी ने किसानों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनते हुए मामले की जांच और नियमानुसार उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।






