जालौन में ‘कुदरत के कहर’ से हाहाकार: तबाह हुईं फसलें, उखड़े बिजली के पोल; भाकियू ने डीएम दफ्तर घेरा, अल्टीमेटम जारी!

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन (उत्तर प्रदेश)। बुंदेलखंड की धरती पर एक बार फिर कुदरत ने ऐसा तांडव मचाया है जिसने अन्नदाता की कमर तोड़ कर रख दी है। हाल ही में आए भीषण आंधी-तूफान और बेमौसम मूसलाधार बारिश ने जालौन जिले के ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही मचाई है। खेतों में खड़ी और कटी रखी मूंग की फसल पूरी तरह जमींदोज हो चुकी है, गरीबों के आशियाने उजड़ गए हैं और बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। इस महा-संकट के बीच, सोए हुए प्रशासन को जगाने के लिए भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को भाकियू के दिग्गजों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर जिलाधिकारी को अपनी मांगों का पुलिंदा सौंपा।
मूंग की फसल पर ‘प्रकृति की सर्जिकल स्ट्राइक’, मुआवजे पर अड़े किसान
इस खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, जालौन का किसान इस समय दोहरे मोर्चे पर लड़ रहा है। एक तरफ प्रकृति की मार है, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक बेरुखी। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन के नेतृत्व में सैकड़ों आक्रोशित किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में हुंकार भरी।
भाकियू नेताओं का स्पष्ट आरोप है कि भीषण आंधी-तूफान के कारण जिले में बड़े पैमाने पर मूंग की फसल बर्बाद हो चुकी है। लागत लगाना तो दूर, किसानों के पास अब खाने तक के लाले पड़ गए हैं। संगठन ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को सौंपे ज्ञापन में साफ चेतावनी दी है कि अगर तत्काल प्रभाव से नुकसान का निष्पक्ष और पारदर्शी सर्वे नहीं कराया गया, तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
अंधेरे में डूबे दर्जनों गांव: बिजली और पानी के लिए त्राहि-त्राहि
तूफान का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने ग्रामीण जीवन की जीवनरेखा को ही काट दिया है। ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के अनुसार, चक्रवाती हवाओं के कारण दर्जनों गांवों में विद्युत पोल ताश के पत्तों की तरह ढह गए और भारी-भरकम ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए।
नतीजतन, ग्रामीण इलाकों में पिछले कई दिनों से घोर बिजली संकट बना हुआ है। बिजली गुल होने का सीधा असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ा है, जिससे तपती गर्मी के इस मौसम में ग्रामीण जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। इसके साथ ही, क्षेत्र की गौशालाओं में बंद बेजुबान गोवंश भी चारे और पानी के अभाव में तड़पने को मजबूर हैं। भाकियू के जिलाध्यक्ष द्विजेंद्र सिंह निरंजन ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए तत्काल विद्युत बहाली और गौशालाओं की सुध लेने की मांग उठाई है।
बिचौलियों के चंगुल से बचाने के लिए ‘मूंग खरीद केंद्र’ की मांग
खोजी पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि आपदा के इस समय में बिचौलिए और आढ़ती सक्रिय हो गए हैं, जो किसानों की लाचारी का फायदा उठाकर औने-पौने दामों पर फसल खरीदने की फिराक में हैं। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए भाकियू ने जिला प्रशासन के सामने शर्त रखी है कि जिले में तत्काल ‘सरकारी मूंग खरीद केंद्र’ स्थापित किए जाएं। किसानों की मांग है कि पारदर्शी तरीके से सीधे वास्तविक किसानों से ही खरीद सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या बिचौलियों की घुसपैठ न हो सके।
आशियाने उजड़े, तालाब सूखे; भाकियू ने सीधे प्रशासन को घेरा
राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन ने तीखे तेवरों में कहा कि इस विनाशकारी तूफान ने कई गरीब मजदूरों और सीमांत किसानों के आशियानों को मलबे में तब्दील कर दिया है। पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। संगठन ने मांग की है कि इन प्रभावितों को तत्काल सरकारी सहायता और आवास विकास योजनाओं के तहत राहत दी जाए।
इसके अलावा, बुंदेलखंड के इस इलाके में जलस्तर लगातार गिर रहा है। भाकियू ने मांग की है कि सूखे पड़े ग्रामीण तालाबों को नहरों और राजकीय नलकूपों के माध्यम से तुरंत भरवाया जाए, ताकि मवेशियों और आम जनमानस को भीषण जल संकट से निजात मिल सके। अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय इस गंभीर ज्ञापन पर कितनी तेजी से एक्शन लेते हैं, या फिर कागजी औपचारिकता के बीच जालौन का किसान बेसहारा ही छोड़ दिया जाएगा।






