जालौन कोर्ट का बड़ा फैसला: ससुराल जाने से मना करने पर पत्नी का गला रेतने वाले हत्यारे पति को उम्रकैद

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जालौन जिला न्यायालय परिसर के बाहर खड़े सुरक्षाकर्मी और अधिवक्ता, जहाँ पत्नी की हत्या के दोषी पति को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन। जनपद के उरई स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक बेहद संवेदनशील और जघन्य हत्याकांड में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने करीब 6 साल पहले अपनी ही पत्नी की बेरहमी से गला रेतकर हत्या करने वाले दोषी पति को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही माननीय न्यायालय ने दोषी पर ₹5,000 का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह फैसला आने के बाद मृतका के परिवार को न्याय मिला है।

मायके में ही चाकू से रेता था गला: जानिए क्या था पूरा मामला

​यह खौफनाक वारदात जालौन के उरई कोतवाली क्षेत्र में आज से करीब 6 साल पहले घटित हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 19 मई 2019 को आरोपी पति जितेंद्र कुमार अपनी पत्नी पूनम को विदा कराने के लिए उसके मायके आया हुआ था। किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और पूनम ने उस समय पति के साथ ससुराल जाने से साफ मना कर दिया।

​ससुराल जाने से इनकार करने की बात जितेंद्र को इस कदर नागवार गुजरी कि उसने गुस्से में आकर अपनी ही पत्नी पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोपी ने पास में रखे धारदार चाकू से सरेआम पूनम का गला रेत दिया। लहूलुहान हालत में पूनम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी और मायके परिवार में कोहराम मच गया था।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिला न्याय

​घटना के तुरंत बाद उरई कोतवाली पुलिस ने मृतका के परिजनों की तहरीर पर आरोपी पति जितेंद्र कुमार के खिलाफ हत्या की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने मामले की बारीकी से तफ्तीश की और अदालत में पुख्ता चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की।

​जिला एवं सत्र न्यायालय में इस मामले की नियमित सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों को अदालत के समक्ष पेश किया गया और वैज्ञानिक व फोरेंसिक साक्ष्यों को मजबूती से कोर्ट के सामने रखा गया। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद, माननीय न्यायाधीश ने जितेंद्र कुमार को अपनी पत्नी की हत्या का दोषी माना और उसे कानून के तहत कड़े से कड़े दंड यानी आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया।

अदालती आदेश पर जिला शासकीय अधिवक्ता का बयान

​इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता लखनलाल निरंजन ने बताया:

​”यह मामला बेहद क्रूरता से जुड़ा हुआ था, जहाँ एक पति ने महज ससुराल न जाने की जिद पर अपनी पत्नी की नृशंस हत्या कर दी थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने सभी गवाहों और साक्ष्यों को बेहद मजबूती के साथ प्रस्तुत किया। माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी जितेंद्र कुमार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस फैसले से समाज में एक कड़ा संदेश जाएगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।”

​इस फैसले के बाद कोर्ट परिसर में मौजूद मृतका के परिजनों की आँखें नम हो गईं। उन्होंने अदालत के इस निर्णय पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि देर से ही सही, लेकिन उनकी बेटी के हत्यारे को उसके कर्मों की सजा मिल गई है।

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