जालौन में गरमाया प्रशासनिक विवाद: डीपीआरओ पर सचिवों के साथ अभद्रता का गंभीर आरोप, कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे कर्मचारी
रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में प्रशासनिक अमले और पंचायत विभाग के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। उरई कलक्ट्रेट परिसर स्थित जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) कार्यालय में उस वक्त हंगामा मच गया, जब ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के पदाधिकारी अपनी मांगों और समस्याओं से जुड़ा ज्ञापन सौंपने पहुंचे। आरोप है कि जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) राम अयोध्या प्रसाद ने ज्ञापन स्वीकार करने के बजाय उसे फेंक दिया और संघ के प्रतिनिधियों के साथ बेहद अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस घटना से आक्रोशित होकर ग्राम पंचायत अधिकारी और संघ के तमाम पदाधिकारी तुरंत कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
ज्ञापन देने पहुंचे संघ पर फूटा अधिकारी का गुस्सा
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के जिला मंत्री पवन तिवारी के नेतृत्व में कई पदाधिकारी और सचिव अपनी विभागीय समस्याओं के समाधान के संबंध में ज्ञापन सौंपने के लिए डीपीआरओ कार्यालय गए थे। संघ का आरोप है कि जब उन्होंने शालीनता के साथ अपनी बात रखनी चाही, तो डीपीआरओ राम अयोध्या प्रसाद आग बबूला हो गए। आरोप है कि उन्होंने न सिर्फ संघ के पदाधिकारियों के साथ अभद्रता की, बल्कि उनके हाथ से ज्ञापन छीनकर फेंक दिया। इस अप्रत्याशित और तानाशाही पूर्ण रवैये से वहां मौजूद सभी सचिव सन्न रह गए।
कलक्ट्रेट परिसर में शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना
डीपीआरओ के इस आचरण से गुस्साए ग्राम पंचायत अधिकारियों ने मौके पर ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते पूरा मामला तूल पकड़ गया और सभी सचिव डीपीआरओ कार्यालय के मुख्य द्वार के बाहर धरने पर बैठ गए। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोपी अधिकारी के खिलाफ तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।
संघ के जिला मंत्री और प्रमुख वक्ता पवन तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:
“हम लोग अपनी जायज समस्याओं को लेकर एक प्रशासनिक अधिकारी के पास शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने गए थे। लेकिन डीपीआरओ साहब ने जिस प्रकार का अपमानजनक और अभद्र व्यवहार हमारे साथ किया है, वह कतई सहन करने योग्य नहीं है। जब तक अधिकारी द्वारा माफी नहीं मांगी जाती और शासन स्तर पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक हमारा यह धरना समाप्त नहीं होगा।”
पहले भी विवादों के घेरे में रहे हैं डीपीआरओ
स्थानीय सूत्रों और विभागीय कर्मचारियों के अनुसार, यह कोई पहला मौका नहीं है जब जिला पंचायत राज अधिकारी राम अयोध्या प्रसाद अपने कार्यप्रणाली या विवादों को लेकर चर्चा में आए हों। इससे पहले भी उनके कार्यकाल के दौरान कई तरह के प्रशासनिक विवाद सामने आ चुके हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उनका रवैया हमेशा से अधीनस्थों के प्रति तानाशाहीपूर्ण रहा है, जिससे विभाग का माहौल लगातार खराब हो रहा है।
प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप
कलक्ट्रेट परिसर में अचानक हुए इस धरने-प्रदर्शन से जिला प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है। पंचायत राज विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मातहत कर्मचारियों के साथ इस तरह के बर्ताव की खबर फैलते ही अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। समाचार लिखे जाने तक प्रशासनिक अधिकारी नाराज सचिवों को मनाने और मामले को शांत कराने के प्रयासों में जुटे हुए थे, लेकिन कर्मचारी अपनी जिद्द पर अड़े हुए हैं। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक अधिकारियों और मैदानी स्तर के कर्मचारियों के बीच के बिगड़ते तालमेल को उजागर कर दिया है।






