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जालौन: डकोर में किशोरी की मौत ने उठाए कई सवाल, छेड़खानी और धमकियों से टूटकर दी जान, परिजन न्याय को भटकने को मजबूर

जालौन(डकोर): डकोर कोतवाली क्षेत्र से सामने आया एक दर्दनाक मामला न सिर्फ इंसानियत को झकझोरता है, बल्कि पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। गांव के एक युवक द्वारा लगातार की जा रही छेड़खानी, मानसिक प्रताड़ना और कथित ब्लैकमेलिंग से परेशान एक किशोरी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद से पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है और न्याय की आस लिए प्रशासन के चक्कर काट रहा है।
परिजनों का आरोप है कि गांव का ही एक युवक कोचिंग जाते समय किशोरी को लगातार परेशान करता था। आए दिन अश्लील इशारे, फब्तियां और छेड़खानी उसकी दिनचर्या बन गई थी। किशोरी ने कई बार विरोध किया, लेकिन आरोपी युवक की हरकतें रुकने के बजाय और बढ़ती चली गईं।
आरोप है कि युवक ने किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने घर बुलाया, जहां उसके साथ घिनौनी हरकत की गई और अश्लील तस्वीरें भी खींच ली गईं। इन तस्वीरों के जरिए किशोरी को डराया-धमकाया जाने लगा। परिजनों के मुताबिक, इसी डर और बदनामी के भय में किशोरी पूरी तरह मानसिक तनाव में चली गई थी।
मामला यहीं नहीं रुका। जब पीड़िता और उसके परिजनों ने इस संबंध में शिकायत की, तो आरोपी युवक के पिता और भाई भड़क उठे। आरोप है कि उन्होंने उल्टा पीड़ित परिवार को धमकाया और मामले को दबाने के लिए जबरन शादी कराने की बात कही। दबंगई और धमकियों के चलते किशोरी और अधिक सहम गई।
बीती 19 दिसंबर की शाम, लगातार हो रही प्रताड़ना, छेड़खानी और सामाजिक बदनामी के डर से टूट चुकी किशोरी ने घर में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, वहीं गांव में मातम पसरा हुआ है।
परिजनों का कहना है कि आत्महत्या से पहले भी उन्होंने पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन आरोपी युवक, उसके पिता और भाई के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि दबंगों के प्रभाव में आकर शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसका नतीजा यह भयावह घटना रही।
न्याय की उम्मीद में परिजन अब जिलाधिकारी कार्यालय जालौन पहुंचे और जिलाधिकारी को शिकायत पत्र सौंपा। परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोपी युवक समेत उसके पिता व भाई के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
फिलहाल मामला प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन बताया जा रहा है। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती, और कब पीड़ितों को सही मायनों में न्याय मिलेगा।

रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, जालौन |UP SAMVAD
Source: Local Sources

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