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ग्राम बंधौली में अमानवीय हालात, मोक्ष धाम के अभाव में खड़ी फसल के बीच हुआ अंतिम संस्कार

जालौन(उरई):डकोर विकासखंड अंतर्गत ग्राम बंधौली से एक बेहद संवेदनहीन और शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां गांव में मोक्ष धाम न होने के कारण ग्रामीणों को खड़ी फसल के बीच ही अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह घटना न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति को भी सामने लाती है।जानकारी के अनुसार ग्राम बंधौली निवासी अवध रानी पत्नी स्वर्गीय बदलू प्रसाद का निधन हो गया। परिजनों ने जब अंतिम संस्कार की तैयारी की, तो गांव में श्मशान/मोक्ष धाम न होने की सच्चाई फिर से सामने आ गई। मजबूरी में परिजनों और ग्रामीणों ने खेतों के बीच खड़ी फसल के पास ही चिता सजाकर अंतिम संस्कार किया। इस दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम थीं और सभी के मन में सिस्टम के प्रति गहरा आक्रोश दिखाई दिया।ग्रामीणों का कहना है कि बंधौली गांव में वर्षों से मोक्ष धाम की मांग की जा रही है। कई बार ग्राम पंचायत से लेकर संबंधित अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरी में हर बार किसी न किसी को खेतों, बंजर जमीन या खुले स्थान पर अंतिम संस्कार करना पड़ता है, जो मानवीय गरिमा के बिल्कुल विपरीत है।ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सरकार गांव-गांव बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो फिर एक जरूरी सुविधा जैसे मोक्ष धाम की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं हो पाई। यह घटना तथाकथित “डबल इंजन सरकार” के विकास के दावों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम बंधौली में तत्काल भूमि चिन्हित कर मोक्ष धाम का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को इस तरह की पीड़ा और अपमानजनक स्थिति का सामना न करना पड़े। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।फिलहाल यह घटना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है और यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में इंसान को मरने के बाद सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार का अधिकार मिल पा रहा है या नहीं।

रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, जालौन |UP SAMVAD
Source: Local Sources

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