आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ बागी शरीफ का 185वां सालाना उर्स, कव्वाली और कुल शरीफ में उमड़ा जायरीन का सैलाब

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जालौन के कदौरा स्थित बागी शरीफ दरगाह पर 185वें सालाना उर्स के दौरान चादर पोशी करते जायरीन और सज्जादा नशीन।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कदौरा(जालौन): जनपद जालौन के ऐतिहासिक कस्बा कदौरा स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बागी शरीफ में आस्था और अकीदत का संगम देखने को मिला। यहाँ स्थित आस्ताना आलिया आलमिया बक़ाईया में 185वां सालाना उर्स बक़ाईया पूरी गरिमा, धार्मिक परंपरा और एहतराम के साथ संपन्न हुआ। इस रूहानी कार्यक्रम की सरपरस्ती सज्जादा नशीन हज़रत हाफ़िज़ सैय्यद रियाज़ अली बक़ाई ने की। उर्स के दौरान न केवल स्थानीय लोग, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आए हजारों जायरीन ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर बुजुर्गों की बारगाह में मत्था टेका।

कुरआन ख्वानी के साथ हुआ उर्स का शुभारंभ

​उर्स की रस्मों का विधिवत आगाज़ सुबह फजर की नमाज़ के उपरांत पवित्र कुरआन ख्वानी से किया गया। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, दरगाह परिसर में अकीदतमंदों की आमद बढ़ती गई। बागी शरीफ की गलियां ‘या बक़ाई’ के नारों और दुआओं से गुंजायमान रहीं। दरगाह पर सुबह से ही जायरीन का तांता लगा रहा, जहाँ लोगों ने मन्नतें मांगी और देश में अमन-चैन की दुआ की।

फातेहा ख्वानी और लंगर-ए-आम का आयोजन

​असर की नमाज़ के बाद एक विशेष धार्मिक सभा का आयोजन हुआ, जिसमें हज़रत मौलवी मुहम्मद बका उल्लाह शाह कु़द्दिसा सिर्रहु की फातेहा पूरी अदब और पाबंदी के साथ अदा की गई। फातेहा के तुरंत बाद ‘लंगर शरीफ’ का वितरण किया गया। उर्स कमेटी द्वारा आयोजित इस विशाल लंगर में बिना किसी भेदभाव के सभी धर्मों और वर्गों के हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया, जो सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनुपम मिसाल पेश कर रहा था।

चादर पोशी और जुलूस-ए-गागर

​इशा की नमाज़ के बाद कार्यक्रम का सबसे मुख्य और आकर्षक हिस्सा गागर व चादर शरीफ का भव्य जुलूस रहा। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और धार्मिक नारों के बीच यह जुलूस कस्बे के विभिन्न मार्गों से होता हुआ दरगाह शरीफ पहुंचा। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों का उत्साह देखते ही बनता था। दरगाह पहुंचकर बुजुर्गों की बारगाह में अकीदत के साथ चादर और संदल पेश किया गया। इस मौके पर सज्जादा नशीन ने जायरीन को सूफी संतों की शिक्षाओं पर चलने का संदेश दिया।

महफिले समां: सूफियाना कलामों से सजी रात

​चादर पोशी के उपरांत आयोजित ‘महफिले समां’ (कव्वाली) ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। मशहूर कव्वाल सबी अहमद चिश्ती खैराबादी और एहसान निजामी मौदहा ने अपने शानदार कलामों और सूफियाना अंदाज से पूरी रात महफिल को रोशन रखा। कव्वालों ने जब बुजुर्गों की शान में कसीदे पढ़े, तो श्रोता भावविभोर हो उठे। इस रूहानी महफिल में हज़रत सैय्यद हस्सान मियां साहब और हज़रत सैय्यद दानिश मियां साहब सहित कई प्रमुख हस्तियों और धर्मगुरुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रशासनिक सहयोग और समापन

​देर रात करीब 3 बजे ‘कुल शरीफ’ की रस्म के साथ 185वें उर्स का विधिवत समापन हुआ। इस दौरान दरगाह कमेटी ने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस का आभार व्यक्त किया। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि भारी भीड़ के बावजूद सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम रहे, जिससे जायरीन को किसी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

​बागी शरीफ का यह उर्स न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा, बल्कि इसने गंगा-जमुनी तहजीब को भी मजबूती प्रदान की।

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