डीएम की चौखट पर मिला न्याय: उरई कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ने दिखाई सख्ती, मौके पर ही निपटाईं कई शिकायतें

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जालौन के उरई कलेक्ट्रेट में फरियादियों की समस्याएं सुनते जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और उपस्थित प्रशासनिक अधिकारी

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन (उरई): उत्तर प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप आमजन की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के उद्देश्य से आज जालौन के उरई कलेक्ट्रेट परिसर में भव्य ‘जनसुनवाई’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने स्वयं कमान संभालते हुए जनपद के दूर-दराज के क्षेत्रों से आए सैकड़ों फरियादियों की पीड़ा सुनी। इस दौरान डीएम का सख्त रुख और मानवीय दृष्टिकोण दोनों ही देखने को मिले, जहाँ उन्होंने अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में कार्यप्रणाली सुधारने की चेतावनी दी।

विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतों का अंबार

​जनसुनवाई की शुरुआत होते ही कलेक्ट्रेट परिसर में फरियादियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शिकायतों के पिटारे में मुख्य रूप से अवैध कब्जों से जुड़े भूमि विवाद, राजस्व विभाग की पेंडिंग फाइलें, वृद्धावस्था एवं दिव्यांग पेंशन में आ रही बाधाएं, प्रधानमंत्री आवास योजना के आवंटन में विसंगतियां और गंभीर बीमारियों के उपचार हेतु आर्थिक सहायता की मांग शामिल रही। जिलाधिकारी ने एक-एक कर प्रत्येक फरियादी को सुना और उनके प्रार्थना पत्रों पर संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया।

लापरवाही पर जिलाधिकारी की सख्त चेतावनी

​अधिकारियों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने स्पष्ट लहजे में कहा कि जनसुनवाई को केवल एक ‘सरकारी औपचारिकता’ न माना जाए। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि “जन समस्याओं का समाधान ही प्रशासन की वास्तविक कसौटी है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी स्तर पर शिकायतों के निस्तारण में शिथिलता या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

त्वरित निस्तारण और गुणवत्तापूर्ण समाधान पर जोर

​डीएम ने मौके पर मौजूद उपजिलाधिकारियों (SDM) और तहसीलदारों को निर्देशित किया कि जो मामले तत्काल सुलझाए जा सकते हैं, उन्हें उसी समय निस्तारित किया जाए। कई मामलों में जिलाधिकारी ने फोन पर ही संबंधित विभाग के प्रमुखों को निर्देश देकर फरियादियों को राहत पहुंचाई। जिन प्रकरणों में जांच की आवश्यकता है, उनके लिए एक निश्चित समयसीमा (Deadline) निर्धारित की गई है। जिलाधिकारी ने कहा कि केवल रिपोर्ट लगाना समाधान नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण समाधान होना चाहिए जिससे शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट हो।

आमजन का विश्वास और सुशासन की परिकल्पना

​कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जनसुनवाई केवल शिकायतें सुनने का एक मंच नहीं है, बल्कि यह आम जनता और प्रशासन के बीच विश्वास के सेतु को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को न्याय दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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