जालौन: पिरौना गांव में भीषण अग्निकांड, किसान की मेहनत खाक; गेहूं, सरसों और भूसा जलकर राख

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जालौन के पिरौना गाँव में किसान के बाड़े में लगी भीषण आग के बाद जलकर राख हुआ भूसा और अनाज, मौके पर मौजूद ग्रामीण और दमकल कर्मी

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

एट (जालौन) : उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के अंतर्गत आने वाले एट थाना क्षेत्र से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ के ग्राम पिरौना में सोमवार को दोपहर के समय अचानक लगी भीषण आग ने एक गरीब किसान के सपनों और साल भर की मेहनत को चंद मिनटों में राख के ढेर में बदल दिया। इस अग्निकांड में किसान का अनाज और पशुओं का चारा पूरी तरह नष्ट हो गया है, जिससे पीड़ित परिवार के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

दोपहर की तपिश में अचानक भड़की आग

​मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पिरौना के मोहल्ला रामपुरा निवासी प्रमोद विश्वकर्मा के बाड़े में सोमवार दोपहर लगभग 12:30 बजे अचानक आग की लपटें उठती देखी गईं। जब तक कोई कुछ समझ पाता, तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। गर्मियों की तेज हवाओं और सूखे चारे के कारण आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ ही पलों में धुएं का काला गुबार आसमान को छूने लगा। धुएं को देखकर पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकल आए।

ग्रामीणों का संघर्ष और बेअसर प्रयास

​आग की भयावहता को देखते हुए ग्रामीणों ने तत्परता दिखाई और अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू किया। दर्जनों ग्रामीण बाल्टी, घड़ों और पाइप के माध्यम से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश करने लगे। हालाँकि, आग इतनी भीषण थी कि ग्रामीणों के ये सीमित प्रयास ऊंट के मुँह में जीरा साबित हुए। लपटों की तपिश के कारण कोई भी बाड़े के भीतर घुसने का साहस नहीं जुटा पा रहा था, जिसके चलते बाड़े में रखा सामान सुरक्षित निकालना असंभव हो गया।

प्रशासनिक मुस्तैदी और दमकल की कार्रवाई

​घटना की सूचना तत्काल डायल 112 पुलिस और दमकल विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही एट थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम दमकल वाहनों के साथ मौके पर पहुँची। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत और घंटों के प्रयास के बाद आग पर पूर्ण रूप से काबू पाया। यदि समय रहते दमकल विभाग सक्रिय न होता, तो आग की ये लपटें पास स्थित अन्य रिहायशी मकानों को भी अपनी चपेट में ले सकती थीं।

भारी आर्थिक क्षति: किसान के सामने दाने-दाने का संकट

​पीड़ित किसान प्रमोद विश्वकर्मा ने रुंधे गले से बताया कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से उगाया गया लगभग दस कुंतल गेहूं और चार कुंतल सरसों बाड़े में सुरक्षित रखा था। इसके साथ ही पशुओं के लिए भारी मात्रा में एकत्र किया गया भूसा भी वहीं मौजूद था। प्रमोद ने बताया कि उन्होंने उम्मीद जताई थी कि इस अनाज से उनके परिवार का भरण-पोषण होगा और सरसों को बेचकर वे अपनी अन्य आर्थिक जरूरतों को पूरा करेंगे, लेकिन कुदरत के इस कहर ने सब कुछ छीन लिया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, किसान को हजारों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।

आग लगने का कारण अभी भी रहस्य

​अग्निकांड के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मामले की जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि या तो किसी शॉर्ट सर्किट या फिर किसी जलती हुई चिंगारी के कारण यह दुर्घटना हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित किसान की दयनीय स्थिति को देखते हुए उसे उचित मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वह इस संकट की घड़ी से उबर सके।

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