दस साल बाद फिर संकट में कालपी का ऐतिहासिक यमुना पुल; भारी वाहनों के लिए लगा नो-एंट्री का बोर्ड, एनएचएआई ने लागू किया मेगा डायवर्जन प्लान

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जालौन के कालपी में पुराने यमुना पुल का दृश्य, जहाँ NHAI के कर्मचारी मरम्मत कार्य कर रहे हैं और भारी वाहनों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग व ट्रैफिक पुलिस तैनात है।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कालपी (जालौन) : बुंदेलखंड और मध्य भारत को उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर व राजधानी लखनऊ से जोड़ने वाला ऐतिहासिक पुराना कालपी यमुना पुल एक बार फिर तकनीकी खराबी के कारण चर्चा में है। पुल की बियरिंग में आई खराबी को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत पुल से भारी वाहनों (ट्रक, बस और डंपर आदि) के आवागमन पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी गई है। करीब पांच दशक पुराने इस लाइफलाइन पुल को सुरक्षित रखने के लिए एनएचएआई ने युद्ध स्तर पर तकनीकी मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। प्रशासन ने यातायात को सुचारू रखने के लिए शहर में नया रूट डायवर्जन प्लान लागू किया है।

दुर्गा मंदिर चौराहे से नए पुल की तरफ मुड़ेंगे भारी वाहन

​एनएचएआई और जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई नई व्यवस्था के अनुसार, अब कानपुर और झांसी की ओर आने-जाने वाले सभी भारी वाहनों को दुर्गा मंदिर चौराहे से नए यमुना पुल की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और दैनिक यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कार, ऑटो और अन्य छोटे चार पहिया व दुपहिया वाहनों को फिलहाल पुराने पुल से ही गुजरने की अनुमति दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि बियरिंग बदलने और तकनीकी खामियों को पूरी तरह दुरुस्त करने में लंबा समय लग सकता है, जिसके कारण यह प्रतिबंध आगामी आदेशों तक जारी रहेगा।

रोजाना गुजरते हैं 10 हजार वाहन, जाम की आशंका से सहमे लोग

​रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस पुल से रोजाना औसतन 10,000 से अधिक छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। यह मार्ग मुंबई, गुजरात, मध्य प्रदेश से लेकर कानपुर, लखनऊ और पूर्वांचल को जोड़ने वाला मुख्य जरिया है। डायवर्जन लागू होने के बाद से चौरा और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों में ट्रैफिक का दबाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

​स्थानीय जानकारों का कहना है कि जिस मार्ग से भारी वाहनों को नए पुल की ओर भेजा जा रहा है, उसी रूट का उपयोग बालू घाटों से निकलने वाले ओवरलोड ट्रक भी करते हैं। ऐसे में चौराहों पर भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न होने की पूरी आशंका बनी हुई है, जो स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

10 साल पुराना इतिहास: जब 6 महीने बंद रहा था पुल

​यह पहला मौका नहीं है जब इस ऐतिहासिक पुल की सेहत बिगड़ी हो। करीब दस वर्ष पहले भी अत्यधिक ओवरलोडिंग और भारी वाहनों के अनियंत्रित दबाव के कारण इस पुल की मुख्य बीम चटक गई थी। उस समय पुल की मरम्मत में लगभग छह महीने का लंबा वक्त लगा था, जिससे पूरा क्षेत्र हफ्तों तक जाम की चपेट में रहा था। हालांकि, इस बार एनएचएआई ने किसी बड़े हादसे का इंतजार न करते हुए, समय रहते तकनीकी गड़बड़ी को भांप लिया और रूटीन चेकिंग के दौरान बियरिंग की मरम्मत का काम तुरंत शुरू कर दिया है।

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने आधी रात को संभाला मोर्चा

​मामले की संवेदनशीलता और नेशनल हाईवे की यातायात व्यवस्था को देखते हुए प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। बीते गुरुवार की देर रात जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कालपी मनोज कुमार सिंह के साथ अचानक घटना स्थल का औचक निरीक्षण किया।

डीएम ने दी सख्त चेतावनी:

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक उत्तम सिंह को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि नगर सीमा से लेकर कानपुर बॉर्डर की सीमा तक लगातार मोबाइल पेट्रोलिंग की जाए। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि डायवर्जन के कारण क्षेत्र में जाम की स्थिति बनती है या आम जनता को असुविधा होती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और एनएचएआई के कर्मचारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

​इस उच्च स्तरीय निरीक्षण के दौरान पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) अवधेश सिंह समेत एनएचएआई और स्थानीय पुलिस प्रशासन के तमाम आला अधिकारी व कर्मचारी मौके पर मुस्तैद रहे, ताकि डायवर्जन प्लान को बिना किसी बाधा के लागू किया जा सके।

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